नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सोमवार को कहा कि फास्टैग तकनीक कोविड-19 संकट के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, क्योंकि इसकी मदद से बिना संपर्क किए राजमार्गों पर चुंगी कर वसूलना आसान हुआ है। फास्टैग एक राजमार्गों पर चुंगी कर वसूलने की रेडियो आवृत्ति आधारित एकीकृत तकनीक है। इसे वाहन पर लगा दिया जाता है। राजमार्गों पर इसकी पहचान करने वाले उपकरण स्वत: सीधे व्यक्ति के बैंक खाते से चुंगी कर काट लेते हैं और ग्राहक के पास उसका संदेश पहुंच जाता है। मई 2020 की शुरुआत तक देश में कुल 1.68
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भाषा | Updated:
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सोमवार को कहा कि फास्टैग तकनीक कोविड-19 संकट के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, क्योंकि इसकी मदद से बिना संपर्क किए राजमार्गों पर चुंगी कर वसूलना आसान हुआ है। फास्टैग एक राजमार्गों पर चुंगी कर वसूलने की रेडियो आवृत्ति आधारित एकीकृत तकनीक है। इसे वाहन पर लगा दिया जाता है। राजमार्गों पर इसकी पहचान करने वाले उपकरण स्वत: सीधे व्यक्ति के बैंक खाते से चुंगी कर काट लेते हैं और ग्राहक के पास उसका संदेश पहुंच जाता है। मई 2020 की शुरुआत तक देश में कुल 1.68 करोड़ से फास्टैग जारी किए जा चुके हैं। एनएचएआई ने एक बयान में कहा कि फास्टैग सिर्फ वर्तमान में नहीं, बल्कि कोविड-19 लॉकडाउन (बंद) के बाद भी बहुत उपयोगी साबित होने वाला है। प्राधिकरण ने कहा कि आज जब देश में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जा रहा है, तब हम इस प्रौद्योगिकी का उल्लेख किए बगैर कैसे रह सकते हैं जिसने हमारे जीवन को बेहतर बनाया है। यह तकनीकी चु्ंगी कर बूथों पर बिना मानवीय संपर्क के चुंगी वसूलने की सुविधा देती है। यह चालकों और चुंगी कर बूथ कर्मियों के बीच कोरोना वायरस फैलने की संभावना को नगण्य बनाने वाली तकनीक है।
(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)
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