अकसर देखा गया है कि गूगल और स्काईस्कैनर जैसे मेटासर्च इंजन पर फ्लाइट की टिकट के जो दाम बताए जाते हैं, वो एयरलाइन कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट से ज्यादा होती हैं। आमतौर पर ये अंतर इंटरनेशनल फ्लाइट की टिकट में देखने को मिलता है। इसी को ध्यान में रखकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पैसेंजर्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की है।
क्या है एडवाइजरी में: डीजीसीए की एडवाइजरी के मुताबिक, “अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों की यात्रा करने वाले यात्रियों से अनुरोध है कि वे संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट से किराए की जांच करें क्योंकि मेटासर्च इंजन कई बार वास्तविक किराया को नहीं दिखाते हैं।”
एयरलाइन कंपनियों को भी आदेश: इससे पहले सोमवार को डीजीसीए ने एयरलाइन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि मेटासर्च इंजन वेबसाइट पर दिखाया जाने वाला हवाई किराया उनकी खुद की वेबसाइट पर दिखाए जा रहे किराये से अधिक नहीं हो। डीजीसीए के वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कई बार मेटासर्च इंजन पर टिकट किराये एयरलाइंस की वेबसाइट पर दिखाए गए किराये से अधिक होते हैं, जिससे असमंजस पैदा होती है। यही वजह है कि नियामक ने एयरलाइन कंपनियों को आदेश जारी किया है।
नेशनल पेंशन स्कीम में बदलाव की है तैयारी? केंद्र सरकार ने दिया ये जवाब
आपको बता दें कि गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने ट्विटर पर शिकायत की थी कि ब्रिटिश एयरवेज का 26 अगस्त का दिल्ली-लंदन उड़ान का इकोनॉमी श्रेणी का किराया 3.95 लाख रुपए बताया गया। हालांकि, नागर विमानन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अगस्त के दौरान दिल्ली-लंदन उड़ान का किराया 1.03 लाख रुपए से 1.47 लाख रुपए के बीच है।







