अभी के समय में फ्लैट्स की कीमत कम होने के बदले बढ़ती ही जा रही है. खुद के घर का सपना देखने वाले भी अब खुद का घर नहीं खरीद पा रहे हैं. इसी बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है. नेशनल एंटी-प्रोफिटरिंग अथॉरिटी (NAA) ने अब बिल्डरों पर कार्रवाई करना शुरू कर दी है. आपको बता दें कि इस साल कोरोना महामारी के कारण बिल्डर्स मनमाना तरीके से फ्लैट्स बेच रहे थे. साथ ही खरीदारों को फायदा भी नहीं दे रहे थे. वहीं, GST लागू होने के बाद से बिल्डरों पर नकेल कसी जा रही है.

बिल्डरों को दी गई सख्त हिदायत 

बता दें कि इस साल कोरोना महामारी के चलते नेशनल एंटी-प्रोफिटरिंग अथॉरिटी अबतक चुप बैठी थी लेकिन अब बिल्डरों पर कार्रवाई  शुरू कर दी है. खबरों के मुताबिक, नेशनल एंटी प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी ने अबतक दो बिल्डरों को फ्लैट्स के दाम काम करने के आदेश दिए हैं, साथ ही ये भी कहा है खरीदारों से अधिक पैसा ना वसूलें. इससे पहले एनएए ने कई बिल्डर्स को पेनल्टी का नोटिस भेजा था लेकिन अब अपना आदेश वापस ले लिया.

क्या है GST कानून?

जानकारी के लिए बता दें कि पूरे देश में 1 जुलाई 2017 को GST कानून लागू हुआ था. इस कानून के तहत बिल्डर्स को बिल्डर्स अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर बिल्डिंग मैटेरियल, सर्विसेज और दूसरी सुविधाओं पर टैक्स छूट ले सकते थे, जो पहले नहीं था. GST की पहली पॉलिसी में केंद्र और राज्य सरकारें अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टीज पर कई तरह के टैक्स वसूलती थी, जो कुल मिलाकर 5.5-6.5 प्रतिशत होता था. लेकिन नई पॉलिसी में इसे बारह परसेंट कर दिया गया है. GST काउंसिल ने इनपुट टैक्स क्रेडिट देने का फैसला वापस ले लिया और टैक्स रेट को बारह परसेंट से घटाकर पांच परसेंट कर दिया. अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के केस में ये टैक्स 8 परसेंट से घटाकर एक परसेंट कर दिया गया. इस नए नियम को 1 अप्रैल 2019 से लागू किया गया था.

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