एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के नेता अब्बास सिद्दीकी द्वारा पश्चिम बंगाल में वाम-कांग्रेस गठबंधन को समर्थन दिए जाने को सोमवार को तवज्जो नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह उचित समय पर इस मुद्दे पर विस्तार से बोलेंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संबंध में ओवैसी की पूर्व में आईएसएफ नेता सिद्दीकी से बातचीत हुई थी। सिद्दीकी ने रविवार को कोलकाता में एक रैली में शिरकत की और वाम तथा कांग्रेस का समर्थन करने की घोषणा की। सिद्दीकी द्वारा एआईएमआईएम का साथ छोड़ने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह उचित समय पर इस बारे में कुछ कहेंगे। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी तमिलनाडु में भी चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा, तमिलनाडु में हम निश्चित तौर पर चुनाव लड़ेंगे। पांच साल पहले भी हम वहां चुनाव लड़े थे।
वहीं, वाम दलों के साथ चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) से भी गठबंधन किया है और अब राज्यसभा में पार्टी के उपनेता ने इसे कांग्रेस की मूल विचारधारा के खिलाफ बता दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की उपस्थिति और समर्थन को शर्मनाक बताया है। वहीं, आनंद शर्मा को जवाब देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि यह गठबंधन पार्टी नेतृत्व की मंजूरी से हुआ है।
कांग्रेस के नाराज नेताओं के समूह ‘G-23’ के सदस्य आनंद शर्मा ने ट्वीट किया, ”आईएसएफ और ऐसे अन्य दलों से साथ कांग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है, जो कांग्रेस पार्टी की आत्मा है। इन मुद्दों को कांग्रेस कार्य समिति पर चर्चा होनी चाहिए थी।” उन्होने अगले ट्वीट में कहा, ”सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस चयनात्मक नहीं हो सकती है। हमें हर सांप्रदायिकता के हर रूप से लड़ना है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की उपस्थिति और समर्थन शर्मनाक है, उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।”







