एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में राजकोषीय घाटे को काबू में रखने पर बहुत ज्यादा जोर के बजाए अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के उपायों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इंडिया रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। राजकोषीय घाटा 2021-22 में 6.2 फीसद जबकि इस साल 7 फीसद के करीब रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में राजकोषीय घाटा 7.96 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 3.5 फीसद रहने का अनुमान रखा गया था। लेकिन इंडिया रेटिंग्स के अनुसार सरकार अगर देनदारी का निपटान करती है और कुछ खर्चों को 2021-22 में ले जाती है तो यह 13.44 लाख करोड़ रुपये या 7 फीसद तक जा सकता है। 

 इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेन्द्र पंत ने रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में राजकोषीय घाटा 6.2 फीसद रखे जाने का अनुमान है। अगर बाजार मूल्य पर वृद्धि दर 14 फीसद के आसपास और वास्तविक वृद्धि दर 9.5 से 10 फीसद रहती है तो इसे हासिल किया जा सकता है। रिपोर्ट में 2021-22 में आर्थिक वृद्धि दर 9.6 फीसद रहने का अनुमान है। वहीं चालू वित्त वर्ष में 7.8 फीसद की गिरावट का अनुमान जताया गया है।  सरकार कोरोना वायरस महमारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को संबल देने के लिये उदार राजकोषीय नीति को अपनाया और आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत कई नीतिगत उपायों की घोषणा की। 

2020-21 में 60,000 करोड़ रुपये राजस्व में कमी का अनुमान

रेटिंग एजेंसी के अनुसार जो आर्थिक पैकेज दिए गए, वह 3.5 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 1.8 फीसद बैठता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस पैकेज के बिना भी 2020-21 में 60,000 करोड़ रुपये राजस्व में कमी का अनुमान है। इसका कारण राजस्व प्राप्ति को लेकर अनुमान काफी ऊंचा रखा जाना है।  इसमें कहा गया है, ”इसको देखते हुए, यह साफ है कि 2020-21 में तीन कारणों से राजकोषीय घाटा बजटीय लक्ष्य 3.5 फीसद से कहीं अधिक होगा।

अर्थव्यवस्था में 2017-18 से ही गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार तीन कारक हैं: अर्थव्यवस्था के आकार में कमी। 2020-21 में अर्थव्यवस्था का आकार 224.89 लाख करोड़ रुपये था, जो अब कम होकर 194.82 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यानी इसमें 13.4 फीसद की कमी आई है। दूसरा, राजस्व में अनुमान के मुकाबले कम वृद्धि और तीसरा महामारी से निपटने के लिए अधिक खर्च। साथ ही अर्थव्यवस्था में 2017-18 से ही गिरावट देखी जा रही है। इससे राजकोषीय घाटा बढ़ा है। 2019-20 में यह 4.6 फीसद पहुंच गया जो 2017-18 में 3.5 फीसद था। राजस्व प्राप्ति नवंबर 2020 के अंत में 8.13 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले तीन साल में सबसे कम है और अनुमान का केवल 40.2 फीसद है। इसमें कर राजस्व अनुमान का 42.1 फीसद जबकि गैर-कर राजस्व 32.3 फीसद है जो काफी कम है।



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