केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष में छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की व्यवस्था कर सकती है। सूत्रों के जरिए हिंदुस्तान को मिली जानकारी के मुताबिक सरकार बजट में 100 बेड से कम के अस्पतालों पर टैक्स छूट का प्रावधान ला सकती है।
इसके लिए अस्पतालों की मौजूदगी की क्षमता ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ाने वाली कंपनियों को भी फायदा दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। बजट के दौरान हुई बैठकों में इस बारे में चर्चा की गई है कि टियर 2, टियर 3 और टियर 4 में 50 बेड वाले अस्पतालों को टैक्स छूट के दायरे में शामिल किया जाए।
वहीं ग्रामीण इलाकों में 25 बेड वाले अस्पतालों में निवेश और क्षमता विस्तार पर टैक्स छूट की व्यवस्था की जा सकती है। आयकर ऐक्ट में खास तरह के कारोबार में क्षमता विस्तार पर 100 फीसदी छूट का प्रावधान है लेकिन मौजूदा समय में ये फायदा सिर्फ 100 बेड वाले अस्पतालों को मिलता है।
सरकार का फोकस मिशन आयुष्मान भारत के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक तक पहुंचाने पर बढ़ रहा है। ऐसे में टैक्स छूट के चलते इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
निवेश पर टैक्स छूट की मांग
साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े निवेश पर भी टैक्स छूट का फायदा देने पर विचार किया जा रहा है। इंडस्ट्री चैम्बर फिक्की की तरफ से भी सरकार को सुझाव दिए गए हैं कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रॉविडेंट फंड स्कीम ती तर्ज पर हेल्थकेयर सेविंग फंड की स्थापना की जानी चाहिए। और उसमें टैक्स छूट का भी विकल्प दिया जाए।
ताकि जरूरत के वक्त लोगों को उनका पैसा स्वाथ्य से जुड़ी परेशानियों में बेहतर तरीके से काम आ सके और उनकी बचत को भी बढ़ावा मिले। वहीं फिक्की ने सरकार को ये भी सुझाव दिया है कि स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी पॉलिसी खरीदने पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को भी मौजूदा 25 से बढ़ाकर 50 हजार किया जाना चाहिए। सरकार इन पर भी विचार कर रही है।
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