वित्त वर्ष 2022-23 के आम बजट के ठीक पहले उद्योग मंडल सीआईआई ने रविवार को कहा कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं में सृजित रोजगार के आधार पर प्रोत्साहन की अतिरिक्त दरें भी जोड़ी जानी चाहिए। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सुझाव दिया है कि अधिक संख्या में रोजगार देने वाले चमड़ा एवं खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को निवेश आकर्षित करने और नए रोजगार पैदा करने के लिए प्रोत्साहन योजना के दायरे में लाया जाना चाहिए। 

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने एक बयान में कहा, ”महामारी की मार से उबर रहे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए हमारा यह सुझाव है कि बजट में प्रोत्साहन योजनाओं के भीतर रोजगार-सृजन का पहलू भी जोड़ा जाए।” उद्योग मंडल ने कहा कि अधिक संख्या में रोजगार देने वाले क्षेत्रों को पीएलआई योजनाओं के दायरे में लाया जाना चाहिए। इससे इन क्षेत्रों में निवेश को काफी बढ़ावा मिलेगा। अधिक संख्या में रोजगार देने वाले क्षेत्रों को अधिक रियायतें दी जानी चाहिए। सीआईआई ने आगामी बजट में पीएलआई के अलावा कई अन्य ऐसे कदमों की भी अनुशंसा की है जिनसे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिले। कोविड-19 महामारी की मार सभी आय वर्गों पर पड़ने से बजट में रोजगार-सृजन वाले क्षेत्रों पर ध्यान देना जरूरी है। 

इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए मनरेगा का बजट आवंटन बढ़ाने और आयकर अधिनियम की धारा 80जेजेएए के तहत आय सीमा को बढ़ाने की भी अनुशंसा की गई है। इसके अलावा काम करते हुए प्रशिक्षण की व्यवस्था सभी क्षेत्रों में लागू करने और एमएसएमई के लिए भर्ती संबंधी खर्च कम करने के लिए एक रोजगार मंच शुरू करने की भी मांग की गई है।



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