लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ने वाली पुष्पम प्रिया की सोशल इंजीनियरिंग बिहार की राजनीति के पिच पर फेल हो गई। बिस्फी और बांकीपुर दो सीटों से चुनाव लड़ने वाली पुष्पम प्रिया कभी सीएम पद का दावेदार बता रही थीं और आज जमानत बचाने के भी लाले पड़े हैं। बिस्फी सीट पर पुस्प प्रिया से ज्यादा वोट NOTA को मिले हैं।  बिस्फी सीट पर 11वें राउंड तक पुष्पम प्रिया को केवल 280 वोट मिले थे, जबकि नोटा को 867 वोट।हालांकि अपनी निश्चित और करारी हार को देखते हुए पुष्पम प्रिया ने ट्वीट कर कहा कि बिहार में EVM हैक हो गई है और प्लूरल्स पार्टी के वोट को बीजेपी ने अपने पक्ष में कर लिया।

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बता दें पुष्पम प्रिया ने एक साल पहले हिंदी-अंग्रेजी के तमाम बड़े अखबारों के पहले पन्ने पर फुल पेज विज्ञापन दिया था और इसमें उन्होंने खुद को बिहार के सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया था। इस चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी की तरफ से डॉक्टरों, इंजीनियरों, समाजसेवियों, शिक्षकों, प्रोफेसरों और किसानों को टिकट दिया था। बता दें पुष्पम प्रिया जदयू के एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी हैं।

 बिस्फी सीट पर 11वें राउंड का हाल

अभ्यर्थी दल का नाम पिछले राउंड (ई.वी.एम. मत) वर्तमान राउंड (ई.वी.एम. मत) कुल
तौकीर नेशनलिस्ट कॉंग्रेस पार्टी 434 48 482
डॉ० फैयाज अहमद राष्ट्रीय जनता दल 23776 2984 26760
हरीभूषण ठाकुर ” बचोल ” भारतीय जनता पार्टी 24224 1807 26031
अवधेश कुमार जनतांत्रिक लोकहित पार्टी 399 29 428
मो औसाफ समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक 159 26 185
पुष्पम प्रिया द प्लुरल्स पार्टी 263 17 280
अरविंद कुमार मिश्रा निर्दलीय 51 5 56
अशोक कुमार राय निर्दलीय 73 6 79
इन्द्रजीत महतो निर्दलीय 122 15 137
भरत पासवान निर्दलीय 120 15 135
मनीष कुमार निर्दलीय 209 29 238
महेश्वर प्रसाद चौधरी निर्दलीय 670 88 758
राज कुमार मुखिया निर्दलीय 571 81 652
इनमे से कोई नहीं इनमें से कोई नहीं 759 108 867

मधुबनी जिले के बिस्फी विधानसभा क्षेत्र का खासा महत्व है। बिस्फी मैथिल कवि कोकिल विद्यापति की जन्मस्थली के तौर पर मशहूर है। इस सीट का लोकसभा क्षेत्र मधुबनी लोकसभा क्षेत्र ही है। इस सीट पर अब तक कुल 13 बार विधानसभा का चुनाव हुए हैं, जिसमें 5 बार सीपीआई, 3 बार कांग्रेस और दो बार राजद के प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं। पहली बार 1967 में चुनाव हुआ। तब यहां से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता आरके पूर्बे को जीत मिली थी। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी नूरिद्दीन को हराया था।

1969 के चुनाव में भी आरके पूर्बे ही जीते। 1967 से 2000 तक यह सीट कभी कांग्रेस के पाले में गई, तो कभी सीपीआई के। वाम दलों की इस विधानसभा में 1995 तक पैठ रही।2015 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी फैयाज अहमद को यहां से जीत मिली थी। फैयाज ने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रत्याशी मनोज कुमार यादव को चुनाव में हराया था। तब भी इस सीट पर मुकाबला महागठबंधन और एनडीए के बीच ही रहा और जीत महागठबंधन की हुई थी। तब राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी एनडीए का हिस्सा थी।

वहीं जनता दल यूनाइटेड, महागठबंधन में शामिल था। 2015 के चुनाव में कुल 16 लोग चुनावी समर में थे, जिनमें 2 महिलाएं थीं। कुल 12 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। तब इस सीट पर लगभग 52 फीसदी लोगों ने मतदान किया था। 2010 के चुनाव में भी इस सीट पर फैयाज अहमद जीते थे। उन्होंने जदयू के हरिभूषण ठाकुर को पराजित किया था। 



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