कांग्रेस के सीनियर नेता निखिल कुमार ने सरकार से कई सवाल किए हैं. उनका कहना है कि जब चीन के साथ ऑफिसर लेवल पर बात होती रहती है तो यह कैसे हो गया?

पटनाः कांग्रेस के कद्दावर नेता निखिल कुमार ने गलवान घाटी हिंसा में शहीद हुए 20 जवानों के संबंध में कहा कि यह जो 20 लोग शहीद हुए हैं, इसको लेकर हमलोग बहुत दुखी हैं. दुख हमलोगों का और बढ़ गया क्योंकि 20 में से चार जवान बिहार रेजिमेंट से थे. हम दुखी तो हैं पर हम यह भी जानना चाहते हैं कि ये घटना घटी क्यों? ये कांड क्यों होने दिया गया? हमारी चीनी सेना के साथ एक रिश्तेदारी है. एलएसी के एक तरफ वो है और एक तरफ हम हैं. न वो हमारी तरफ आते हैं और न हम उनकी तरफ जाते हैं. वक्त-बेवक्त हम एक दूसरे से मिलते भी रहते हैं.

निखिल कुमार का कहना है कि एक ऑफिसर लेवल पर उनसे बात होती रहती है तो यह कैसे हो गया और हम उम्मीद करते थे कि हमारे प्रधानमंत्री कुछ बताएंगे. लेकिन प्रधानमंत्री इतने दिनों तक चुप्पी साधी हुई थी. हमने आर्मी चीफ का बयान पढ़ा. इनके अलावा भी जो बाकी अफसरों ने बयान दिया, उसे हमलोगों ने अखबारों में पढ़ा. एक बार हमारे रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा को लेकर चीन के साथ हमारी बात चल रही है. लेकिन उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि आखिर घटना घटी कैसे और यह हमलोगों के लिए सबसे बड़ा कौतूहल है कि आखिर घटना घटी क्यों? इसलिए भी हमारा कौतूहल बढ़ गया क्योंकि प्रधानमंत्री का बयान आया कि किसी ने भारतीय सीमा में प्रवेश नहीं किया.

साथ ही उन्होंने कहा कि प्राइम मिनिस्टर ने यह साफ कर दिया कि ना ही किसी ने हमारे सीमा में प्रवेश किया न ही किसी ने कुछ कैप्चर करने की कोशिश की. यह गवर्मेंट ऑफ इंडिया का बयान है. यह बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि अभी इन साइड टेरेटेरी कोई नहीं है तो इसका क्या मतलब हुआ कि पहले कोई था और अब वो चला गया है. या पहले से ही कोई नहीं है. इन दोनों बातों को हमें जानना जरूरी क्योंकि जब ऐसा था तो हमारे 20 जवान जो शहीद हुए वो कहां हुआ? अगर ये हमारे टेरिटरी में हुआ है तो प्रधानमंत्री ने कैसे कह दिया? इसपर हमलोगों को स्पष्टीकरण चाहिए क्योंकि एक प्रधानमंत्री बोल रहे हैं ये बात, हमें प्रधानमंत्री पर भरोसा रखना चाहिए पर इन्हें बताना होगा कि आखिर ये 20 लोग कहां मरे और कैसे मरे?

निखिल कुमार ने कहा कि सोनिया जी ने यह सवाल पूछा है जिसका जवाब अभी तक नहीं आया है और शुरुआती दौर में ही राहुल गांधी ने भी पूछा था कि लद्दाख की क्या वस्तु स्थिति है ये बहुत ही सीधा सवाल है और किसी भी समझदार नागरिक को ये पूछना चाहिए. इसके जवाब में सीनियर रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर ने राहुल गांधी को ही एंटी नेशनल कह दिया था. तो अब जो सवाल लगातार उठ रहे हैं तो क्या ये सब भी एंटी नेशनल हो गए हैं, सभी जानना चाहते हैं कि वहां क्या हुआ?

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उस दिन राहुल गांधी ही इनका टारगेट था जबकि वो सही सवाल पूछ रहे हैं, वो जानना चाहते हैं कि आखिर वहां क्या हो रहा है? आज प्रधानमंत्री ने जो कहा यह अगर उनके कोई मंत्री या उनका गुर्गा करता तो उचित था पर उनके दिमाग में तो ये है कि राहुल गांधी ने क्यों पूछा?

इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह जो घटना घटी इसकी जानकारी हमें पहले क्यों नहीं हुई, हमारे यहां दो इंटेलिजेंस एजेंसी है एक डोमेस्टिक और एक फॉरेन और ये विषय दोनों के दायरे का है. हमारी एंबेसी वहां चाइना में वो क्या करती है, उनको यह पता करना चाहिए. हमलोगों को यह खबर होनी चाहिए कि ऐसा कुछ होने वाला है. अगर हमें पता होता तो शायद ये घटना घटती ही नहीं तो आखिर इंटेलिजेंस क्यों नहीं है? हमारे पास इससे पहले भी पुलवामा में घटना घटी थी उसमें भी इतने सारे लोग शहीद हुए. एक पिकप ट्रक से इस घटना को अंजाम दिया गया था तो उस ट्रक में इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक भरा था जो कही दूर गांव से चलकर वहां पहुंची और हमें खबर तक नहीं हुई? इसके लिए हम दुहाई ही देते रहे. लेकिन कभी सरकार ने यह नहीं कहा कि इंटेलिजेंस फेलियर हुई है.

निखिल कुमार ने कहा कि जबकि तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मालिक ने बयान दिया था कि यह इंटेलिजेंस की विफलता है और शायद इसीलिए वो वहां से बदल दिए गए. लेकिन उनके बयान पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया, चुप्पी साध ली और इसबार भी इतना बड़ा कांड हो गया जो अभी तक सुलझा भी नहीं है. हमलोग जितने लोगों से बात करते हैं, सभी के मन में बस यही सवाल है कि आखिर कैसे हुआ ये? इसका जवाब कौन देगा?

सीनियर कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री को जवाब देना होगा पर जब उनका ही बयान यह है कि कोई हमारे देश में नहीं आया तो फिर इनको समझाना होगा कि 20 आखिर मरे कहां? अगर यह उनके इलाके में मरे तो ये वहां क्या करने गए थे? क्या ये हमारे सरकार की नीति है? क्या हम चाहते हैं कि LAC को पार करके चाइनीज टेरिटरी में जाए यह नीति कब से हुई? इसलिए देश की आम जनता को प्रधानमंत्री का बताना फर्ज है कि क्या हुआ? क्योंकि जो बताया है उसमे सच्चाई नहीं लगता है.

वहीं विधान परिषद चुनाव में उनकी उम्मीदवारी के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ”मेरे नाम की अगर चर्चा हो रही है तो ये अटकल है मैं इस रेस में नही हूं और मुझे एमएलसी के लिए कंसीडर करने की जरूरत नहीं है. कोई न कोई जाएगा और जाएगा वही जिसे टिकट मिलेगा और टिकट उसी को मिलेगा जिसे हाई कमान कहेगी क्योंकि वही सर्वोपरि है. जिसको भी हाईकमान चुनेगा उसे लड़ना होगा. किसे मिलेगा ये मुझे नहीं मालूम, अगर मुझसे पूछा जाए तो मैं कहूंगा कि एक ऐसे व्यक्ति को दे जो पहली बार चुनाव लड़ रहा हो या फिर जो पार्टी में काफी दिन तक रहा है और पार्टी के प्रति वफादार रहा है, चाहे वो पुरूष हो या महिला हो उनको चुनना चाहिए.”

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