देश की आजादी के बाद बिहार में पहली बार कांग्रेस की करारी हार वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में हुई थी। तब उसे 324 में 57 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। मगर तत्कालीन सरकार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी और तीन वर्षों बाद ही वर्ष 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस 169 सीटें लाकर फिर पूर्ण बहुमत हासिल की। 1980 के पहले भी बिहार में दो बार मध्यावधि चुनाव हुए। एक 1969 और दूसरा 1972 में। 1972 में भी कांग्रेस 318 में 167 सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत हासिल की थी। 

वहीं 1969 में कांग्रेस को 118 सीटें मिली थी। इस तरह देखा जाए आजादी के बाद 1980 तक मध्यावधि चुनाव की तीन बार नौबत आई, जिनमें दो बार कांग्रेस पर जनता ने पूरा भरोसा किया। एक मध्यावधि चुनाव 1969 में हुआ था, जिसमें किसी भी दल को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ था, पर कांग्रेस सबसे अधिक सीटें जीतनें में कामयाब हुई थी।  

जनता पार्टी हो गई थी धराशायी
वर्ष 1977 में 214 सीटें हासिल करने वाली जनता पार्टी 1980 के चुनाव में धराशाही हो गई। 1980 में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी जनता पार्टी (सेकुलर-चौधरी चरण सिंह), जिसे 42 सीटों पर जीत मिली। इसी प्रकार सीपीआई को 23, भारतीय जनता पार्टी को 21, इंडियन कांग्रेस (यू) को 14, जनता पार्टी (जेपी) को 13, झारखंड मुक्ति मोर्चा को 11 और जनता पार्टी (सेकुलर-राजनारायण) को एक सीट मिली थी। तब 23 निर्दलीय जीत कर विधानसभा पहुंचे थे।  

85.33 प्रतिशत वोट राष्ट्रीय दलों को
राष्ट्रीय दलों ने 85.33 प्रतिशत वोटों पर कब्जा किया था। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों को 12.74 प्रतिशत वोट मिले थे। इस तरह देखें तो क्षेत्रीय व राज्य स्तरीय दलों को मात्र दो प्रतिशत वोट पर ही संतोष करना पड़ा था। 

आंकड़े एक नजर में : 
76 महिला प्रत्याथी थीं मैदान में 
11 महिलाएं पहुंची विधानसभा
कुल मतदाता : तीन करोड़ 98 लाख 
मतदाता मतदान किए : दो करोड़ 28 लाख
मतदान का प्रतिशत : 57.28  
मतदान केंद्र : 54538 
उम्मीदवार मैदान में उतरे : 3002 
कुल सीटें : 324 : सामान्य  248, एससी 48, एसटी 28     





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