हाइलाइट्स:

  • बीआरओ ने उत्‍तराखंड में एक अहम पुल को एक हफ्ते के रेकॉर्ड टाइम में फिर से बनाकर तैयार कर दिया
  • पिथौरागढ़ के जिमिघाट इलाके में बना यह बैली ब्रिज 18 जुलाई को भूस्‍खलन में बर्बाद हो गया था
  • यह पुल इसलिए रणनीति रूप से अहम है क्‍योंकि यह मुनस्‍यारी और भारत के आखिरी गांव मिलाम को जोड़ता है

पिथौरागढ़
जिस तरह से चीन के साथ लगने वाली सीमा पर तनाव बढ़ रहा है उसे देखते हुए सेना और अर्धसैनिक बलों के साथ बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) पूरी मुस्‍तैदी से अपना काम कर रहे हैं। हाल ही में बीआरओ ने उत्‍तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में एक अहम पुल को एक हफ्ते के रेकॉर्ड टाइम में फिर से बनाकर तैयार कर दिया। पिथौरागढ़ के जिमिघाट इलाके में बना यह बैली ब्रिज 18 जुलाई को भूस्‍खलन में बर्बाद हो गया था।

यह पुल इसलिए रणनीति रूप से अहम है क्‍योंकि यह मुनस्‍यारी और मिलाम को जोड़ता है। मिलाम भारत चीन सीमा पर भारत का आखिरी गांव है। फिर से बनाए जाने के बाद इसे मंगलवार को दोबारा हल्‍के वाहनों के लिए खोल दिया गया।

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इससे पहले जून में भी इसी रूट पर इसी तरह का पुल भारी बुलडोजर के वजन की वजह से ढह गया था। उसे भी बीआरओ ने रेकॉर्ड 5 दिन में बनाकर तैयार कर दिया था। आमतौर पर इस तरह के पुल बनने में एक महीने का समय लगता है लेकिन मौजूदा हालात और पुल के रणनीतिक महत्‍व को देखते हुए बीआरओ ने इतनी जल्‍दी काम पूरा कर दिया।

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