फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात के बाद बीजेपी में जाने की अटकलों को खारिज कर दिया है। मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि मोहन भागवत से उनका आध्यात्मिक रिश्ता है। बता दें कि दोनों के बीच में लगभग 90 मिनट तक हुई मुलाकात को लोग पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे थे, लेकिन अब उन अटकलों पर मिथुन चक्रवर्ती ने खुद विराम लगा दिया है। 

मिथुन चक्रवर्ती ने मीडिया से कहा कि बैठक का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि वो इससे दूर हैं और अभिनेता ही बने रहना चाहते हैं। वहीं, आरएसएस ने भी कहा कि मिथुन चक्रवर्ती के साथ संघ प्रमुख की मुलाकात लगभग दो साल से लंबित थी और इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है।

एक सवाल के जवाब में मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि पहली बात जो मैं बताना चाहता था, वह यह है कि मैं भागवत के साथ आध्यात्मिक रिश्ता रखता हूं, जो नया नहीं है। उन्होंने एक बार मुझसे कहा था कि जब वह मुंबई में होंगे मुझसे मुलाकात करने आएंगे। वो मुझसे और मेरे परिवार से प्यार करते हैं। आज वह शहर में थे तो एक मुलाकात हो गई। 

मिथुन चक्रवर्ती ने मीडिया से कहा कि आप लोग इसको बंगाल चुनावों से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बैठक का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। राजनीतिक पार्टी ज्वाइन करने की अटकलों के सवाल पर मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि मैंने हमेशा समाज के गरीब तबके के लिए लड़ाई लड़ी है। जो कोई भी गरीबों के कल्याण के लिए कम करेगा, मैं उसका हमेशा समर्थन करूंगा। लेकिन इसमें कोई राजनीति नहीं है। एक और सवाल का जवाब देते हुए मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि मैं अब राजनीति से दूर हूं। मैं एक अभिनेता हूं और ऐसे ही जीना चाहता हूं।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को साल 2014 में टीएमसी ने राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित किया था, लेकिन स्वास्थ्य मुद्दों का हवाला देते हुए दो साल के भीतर ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। साल 2015 में सारदा घोटाल के सिलसिले में उन्हें प्रवर्थन निदेशालय ने तलब भी किया था। 

मिथुन और भागवत के मुलाकात पर क्या बोली टीएमसी?
मिथुन चक्रवर्ती और मोहन भागवत के बीच हुई मुलाकात पर तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। टीएमसी लोकसभा सदस्य और पार्टी प्रवक्ता सौगत रॉय ने कहा कि यह बैठक बीजेपी की हताशा को दर्शाती है। मिथुन एक अभिनेता हैं जिन्होंने खुद को वहीं तक सीमित कर लिया है। बंगाल की राजनीति में उनकी कोई प्रासंगिकता नहीं है। टीएमसी ने कहा कि ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया था, लेकिन उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से धमकियों का सामना करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। रॉय ने कहा कि साल 2015 में चक्रवर्ती ने ईडी को 1.16 करोड़ रुपए लौटा दिए। ये पैसे उन्हें तब मिले थे जब वे सारदा समूह के ब्रांड एंबेसडर थे।



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