Edited By Vishnu Rawal | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

नई दिल्ली

भारत के दोस्तों में शामिल रहे नेपाल का झुकाव इन दिनों साफ तौर पर चीन की तरफ दिख रहा है। हालांकि, भारत में मौजूद नेपाल के राजदूत ऐसा नहीं मानते। भारत में नेपाल के राजूदत नीलांबर आचार्य से जब इसपर सवाल पूछा गया तो वह बोले कि ऐसे आरोप बिल्कुल निराधार हैं। नीलांबर आचार्य ने कहा कि नेपाल एक से रिश्तें बेहतर करने के लिए दूसरे देश से रिश्ते बिगाड़ने की कीमत नहीं चुकाता। नीलांबर से कालापानी विवाद पर सवाल पूछा गया था कि क्या नेपाल ने उसे चीन के कहने पर फिर से उठाया है।

आचार्य ने कालापानी को एक ज्वलंत मुद्दा बताया, और कहा कि इसे जल्द सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ एक मुद्दे की वजह से दो पड़ोसी देशों के रिश्तों में खटास नहीं आनी चाहिए।

नेपाल के राजदूत ने सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि नेपाल मुद्दे को दोस्ताना माहौल में सुलझाना चाहता है। वह बोले कि इसलिए नेपाल ने पिछले साल दिसंबर में इस मुद्द पर बात करने के लिए विदेश सचिव स्तर की बैठक की बात की थी। लेकिन तब तारीख तय नहीं हो पाई और मुद्दा बरकरार रहा।

नेपाली प्रधानमंत्री ओली के अयोध्या वाले बयान पर आचार्य ने कहा कि विदेश मंत्रालय इसपर बयान दे चुका है। पीएम सिर्फ रामायण के एतिहासिक महत्व को बताते हुए और अध्यन की बात कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि ओली ने यह बात कवि भानुभक्त आचार्य के जन्मदिवस पर हो रहे कार्यक्रम में कही थी। उन्होंने रामायण को नेपाली भाषा में अनुवाद किया है। इसका कोई राजनीतिक महत्व नहीं है।



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