नई दिल्ली: महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे पर बीजेपी ने कहा कि उनकी पार्टी ने दबाव बनाया तक जाकर इस्तीफा हुआ है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की खामोशी कई सवाल खड़े करती है. वे इस पूरे मामले पर कब बोलेंगे? उद्धव ठाकरे ने शासन करने का नैतिक आधार को दिया है. ये महाविकास अघाड़ी नहीं बल्कि ‘महावसूली सरकार’ है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है उसमें साफ लिखा है कि जब प्रमुख आरोपी महाराष्ट्र के गृहमंत्री हैं तो मुम्बई पुलिस इसमें निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती. कोर्ट ने माना कि ये बहुत गंभीर मामला है. उम्मीद है कि सीबीआई की जांच में सच सामने आएगा. बात निकली है तो दूर तक जाएगी. मामले की परतें धीरे-धीरे खुलती चली जाएंगी. हम इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उगाही मामले की हर सिरे से जांच होनी चाहिए. आजाद भारत के इतिहास में अब तक ऐसा नही हुआ कि एक पुलिस कमिश्नर ने अपने गृहमंत्री पर इस तरह का आरोप लगाया हो. सीबीआई प्रामाणिकता से जांच करेगी. उन्हें लगता है तो एफआईआर करने का उन्हें अधिकार है.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कल तक पूरी सरकार अनिल देशमुख को बचान में लगी थी. क्या सीएम उद्धव ठाकरे की कोई नैतिकता है या नहीं? शासन करने के नैतिक आधार पर उद्धव ठाकरे वंचित हो गए हैं. उन्होंने शासन चलाने का नैतिक आधार खो दिया है.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. दरअसल, अनिल देशमुख के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की वसूली के आरोपों वाली चिट्ठी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. देशमुख ने इस्तीफे की चिट्ठी अपने ट्वविटर हैंडल पर ट्वीट की है. इसमें उन्होंने कहा कि वे अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहे हैं. पद पर बने रहना नैतिकता के खिलाफ होगा.

सीएम उद्धव ठाकरे को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा, “बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील जयश्री पाटिल की याचिका पर सीबीआई जांच का आदेश है. इस फैसले के बाद गृहमंत्री के पद पर बने रहना नैतिक रूप से ठीक नहीं है. इसलिए मैंने खुद से पद छोड़ने का फैसला लिया है. मेरा इस्तीफा स्वीकार करें.”

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