संसद की एक समिति ने प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना के क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि इस योजना की तरफ ज्यादा किसानों को आकर्षित करने के लिए सरकार को इसमें व्यापक संशोधन करने चाहिए।
क्या है किसान मान धन योजना
यह स्वैच्छिक योजना सितंबर, 2019 में शुरू की गई थी। इसमें लघु एवं सीमांत किसानों को अंशदान देकर पेंशन लेने का विकल्प दिया जाता है। दो हेक्टेयर की जमीन वाले किसानों को सम्मानजनक जीवन व्यतीत करने में मदद करने के इरादे से यह योजना लाई गई थी। पीएम किसान मानधन योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद, जमाकर्ता को 3000 रुपये मासिक या 36000 रुपये सालाना पेंशन मिलती है। इसके लिए अंशदान 55 रुपये से 200 रुपये मासिक है।
योजना के प्रति क्यों उदासीन हैं किसान
हालांकि, कृषि पर गठित संसदीय समिति ने अपनी 24वीं रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को इस योजना के प्रति किसानों के अधिक आकर्षित न होने की वजह तलाशनी चाहिए और अधिक संख्या में किसानों को आकर्षत करने के लिए इस योजना में व्यापक सुधार करने चाहिए। सांसद पी सी गड्डीगौदर की अध्यक्षता वाली इस समिति की तरफ से दिए गए सुझावों पर सरकार की तरफ से तैयार 31वीं कार्रवाई रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई।
18-40 वर्ष की उम्र वाले किसानों की संख्या कम
समिति ने कहा है कि खुद कृषि मंत्रालय भी अपेक्षित संख्या में किसानों के इस योजना से न जुड़ने की बात स्वीकार करता है। मंत्रालय ने इसके लिए 18-40 वर्ष की उम्र वाले किसानों की कम संख्या होने को वजह बताया है। संसदीय समिति ने अपने सुझावों पर अमल न किए जाने पर नाखुशी जताते हुए कहा है कि यह विभाग के खराब कामकाज को दर्शाता है। समिति ने इस रवैये पर गंभीर रुख अख्तियार करते हुए किसान मान धन योजना में व्यापक संशोधन किए जाने के सुझाव को फिर से दोहराया है।
इनपुट: भाषा







