भारतीय उद्योग जगत ने रविवार को भारत रत्न गायिका लता मंगेशकर (Lata mangeshkar) के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ऐसा संगीत फिर नहीं सुनाई देगा। आरपीजी एंटरप्राइजेज के हर्ष गोयनका ने कहा कि ऐसा लगता है कि 92 साल की उम्र में मंगेशकर की मौत के बाद देश की आवाज खामोश हो गई है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘स्तब्ध हूं। हमारे परिवार का एक सदस्य नहीं रहा। हमारे घर पर उसकी हंसी और अंतहीन बातें याद आती हैं।’’

गौतम अडानी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘‘उनकी आवाज, आकर्षण और वह धुन आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेगी। हमारी एकता के लिए लता दीदी से बड़ी श्रद्धांजलि कोई नहीं हो सकती। अगर कोई पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करता है, तो वह लता दीदी थीं, जिन्होंने 36 भाषाओं के गीतों को अपनी बेमिसाल आवाज दी थी। अरबों लोग उन्हें याद करेंगे।’’

देश के दिग्गज कारोबारी और आनंद महिंद्रा ने ट्वीट किया, ‘‘आप क्या कह सकते हैं जबकि आपकी आवाज चली गई …ओम शांति।’’ बैंकर उदय कोटक ने उन्हें ‘‘भारत की पसंदीदा आवाज’’ बताया। 

जी एंटरप्राइजेज के पुनीत गोयनका ने कहा, ‘‘ऐसा संगीत फिर नहीं सुनाई देगा। लोकप्रिय गायिका की आवाज हमेशा हमारे दिलों में गूंजेंगी।’’ स्नैपडील के कुणाल बहल ने कहा कि यह भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए क्षति है, ‘‘काश हमारे बच्चों को उन्हें सीधे सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता।’’

वेदांत के अनिल अग्रवाल ने कहा कि वह फिल्म में मंगेशकर के गाने सुनने के लिए फिल्म के पहले दिन का पहला शो देखने पटना से बनारस ट्रेन से जाते थे।उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘स्वर कोकिला अब नहीं रही। वह पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी और उनके दिलों में अमर रहेंगी।’’

जैव प्रौद्योगिकी कंपनी बायोकॉन की कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने लता मंगेशकर को याद करते हुए उनका गाया गाना ‘तू जहां जहां चलेगा’ साझा किया। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के चेयरमैन एस एम वैद्य ने कहा कि आज देश की स्वर कोकिला की आवाज थम गई। उन्होंने कहा कि इस नुकसान को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। लता जी ने आठ पीढ़ियों तक भारतीयों को मंत्रमुग्ध किया है और वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप की संयुक्त प्रबंध निदेशक संगीता रेड्डी ने कहा कि यह काफी दुखी करने वाला दिन है। मैं इस महान भारतीय हस्ती के निधन में देश के साथ शोक में शामिल हूं।’’ लता मंगेशकर को ‘मेलोडी क्वीन’ कहा जाता था। उन्होंने पांच साल की उम्र में गाने का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। गायिका के रूप में उनके करियर की शुरुआत 1942 में हुई थी। उन्होंने हिंदी, मराठी, तमिल, कन्नड़, बांग्ला सहित 36 भारतीय भाषाओं में गाने गाए हैं।



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