अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर और पूर्व कोच डिएगो माराडोना का निधन हो गया है। अर्जेंटीना को फुटबॉल विश्वल कप जिताने वाले माराडोना ने 60 साल की उम्र में हार्ट अटैक के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। तीन सप्ताह पहले ही उनके दिमाग में ब्लड क्लॉट की सर्जरी हुई थी। मैदान पर फुटबॉल को किक मारने वाले अब तक के सबसे महान खिलाड़ियों में उनकी गिनती होती है। हालांकि, मैदान के बाहर उनकी जिंदगी ड्रग और शराब के नशे से फंसी रही।

अर्जेंटीना को 1986 में वर्ल्ड कप जिताने वाले माराडोना ने इग्लैंड को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाते हुए एक ऐसा गोल किया जिसकी चर्चा आज भी होती है। इसे ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल भी कहा जाता है। इटैलियन टीम नापोली के साथ खेलते हुए भी उन्होंने सफलता हासिल की और 1987, 1990 में सीरीज ए टाइटल के अलावा 1987 और 1991 में यूइफा कप में जीत दिलाई। 

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एक तरफ मारिडोना फुटबॉल की दुनिया के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हो रहे थे तो दूसरी तरफ वह कोकीन के नशे में फंस चुके थे। 1991 में उन्हें 15 महीनों के लिए बैन भी झेलना पड़ा। 1997 में रिटायरमेंट से पहले उन्हें 1994 में वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया गया था।

देखिए ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल

1999 और 2000 में भी उन्हें दिल की बीमारियों की वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। 2004 में भी उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी। उन्हें वजन को कंट्रोल करने के लिए दो बार गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी से गुजरना पड़ा तो शराब के नशे की लत छुड़ाने के लिए भी इलाज लेना पड़ा। जनवरी में उन्हें पेट में ब्लीडिंग की शिकायत हुई तो जुलाई में घुटनों का ऑपरेशन कराना पड़ा था। तीन सप्ताह पहले ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग की वजह से सर्जरी की गई थी। 

माराडोना 1980 के दशक के मध्य में उस समय नशे की गिरफ्त में आए जब वह अपने करियर में पीक पर थे। लेकिन अगले दो दशकों तक वह बुरी तरह नशे में डूबे रहे। 2014 में माराडोना ने अपने नशे की आदत पर कहा था, ”मैं अपने विपक्षियों को बड़ा अडवांटेज देता हूं। आप जानते हैं कि यदि मैं ड्रग्स नहीं लेता तो मैं कैसा खिलाड़ी हो सकता था।” 1996 में उन्होंने एक बार सार्वजनिक रूप से कहा था, ”मैं ड्रग एडिक्ट था, हूं और रहूंगा।” 

अर्जेंटीना की ओर से खेलते हुए माराडोना ने 91 मैचों में 34 गोल किए। अर्जेंटीना की ओर से माराडोना ने चार वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। सिर्फ दस साल की उम्र में वह स्थानीय क्लब एस्त्रोला रोसा से खेलने लगे। दो साल बाद मामूली पैसा देकर लोस कैबोलिटास ने अपने साथ जोड़ा। डिएगो में परिवार को गरीबी से निकालने की धुन सवार हो चुकी थी। असाधारण खेल से वह चर्चित हो चुके थे, पर डिएगो के लिए यह महज शुरुआत थी। 15 साल की उम्र में अर्जेंटीनोसा जूनियर्स से पेशेवर करियर का आगाज किया। 167 मैचों में 115 गोल ठोक डाले। 
 



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