भारत की 100 करोड़ कोविड वैक्सीनेशन की दुनिया भर में तारीफ हो रही है। इस बीच, सीरम इंस्टीट्यूट के मैनेजिंग डायरेक्टर साइरस पूनावाला ने कहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी की वजह से ये मुमकिन हो सका है। साइरस पूनावाला ने ये बात पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कही है। साइरस पूनावाला ने कहा कि उनके मन में इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री ने अगर स्वास्थ्य मंत्रालय का नेतृत्व ना किया होता तो आज भारत टीकों की एक सौ करोड़ खुराक नहीं उपलब्ध करा पाता।

खुश थे पीएम मोदी: उन्होंने कहा, ‘‘जब वह पिछले साल नवंबर में पुणे आए थे तो मैंने उन्हें आश्वस्त किया था कि टीकों के मामले में हम भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे और दुनिया का सबसे सस्ता टीका विकसित करेंगे। आज वह बहुत खुश थे कि उस आश्वासन को हमने पूरा किया है।’’ बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोविड-19 रोधी टीके बनाने वाली सात भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत ने दो दिन पहले ही अपने नागरिकों को टीकों की 100 करोड़ खुराक देने की उपलब्धि हासिल की।

प्रधानमंत्री से इस मुलाकात में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, जाइडस कैडिला, बॉयोलॉजिकल ई, जेन्नोवा बायोफार्मा और पैनेसिया बायोटेक के प्रतिनिधि मौजूद थे। इनके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती पवार ने भी बैठक में शिरकत की। बैठक के बाद एक वीडियो संदेश में जाइडस कैडिला के पंकज पटेल ने कहा कि देश के वैज्ञानिकों ने टीके विकसित किए, उसके लिए सबसे बड़े कारक प्रधानमंत्री थे।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने शुरू से हमें प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा कि आप करो, सरकार आपके साथ है। आपको जहां भी असुविधा होगी, सरकार आपको सहयोग करेगी। इसी वजह से हम टीके विकसित कर पाए।’’उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत में नवोन्मेष का जो नया अध्याय आरंभ हुआ है, वह बहुत तेजी से बढ़ेगा और भारत एक नवोन्मेषी राष्ट्र के रूप में उभरेगा।

बता दें कि देश में टीकाकरण के पात्र वयस्कों में से 75 प्रतिशत से अधिक लोगों को कम से कम एक खुराक लग चुकी है, जबकि करीब 31 प्रतिशत लोगों को टीके की दोनों खुराक लग चुकी हैं। नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सभी पात्र लोगों को टीकों की पहली खुराक दी जा चुकी है।

16 जनवरी से हुई थी शुरुआत: टीकाकरण मुहिम की शुरुआत 16 जनवरी को हुई थी और इसके पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगाए गए थे। इसके बाद दो फरवरी से अग्रिम मोर्चे के कर्मियों का टीकाकरण आरंभ हुआ था। टीकाकरण मुहिम का अगला चरण एक मार्च से आरंभ हुआ, जिसमें 60 साल से अधिक आयु के सभी लोगों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीके लगाने शुरू किए गए।

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देश में 45 साल से अधिक आयु के सभी लोगों का टीकाकरण एक अप्रैल से आरंभ हुआ था और 18 साल से अधिक आयु के सभी लोगों का टीकाकरण एक मई से शुरू हुआ। देश के टीकाकरण अभियान में तीन टीकों सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा तैयार कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और स्पूतनिक वी का इस्तेमाल किया जा रहा है।





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