मोदी सरकार ने बुधवार को उदय (उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना) योजना के तहत वितरण कंपनियों के लिए कर्ज लेने को लेकर कार्यशील पूंजी सीमा नियम में ढील देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वितरण कंपनियों के लिए यह कर्ज 90,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध कराये जाने की योजना का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”बिजली क्षेत्र में समस्या है। बिजली खपत में नरमी है। वितरण कंपनियां बिल संग्रह नहीं कर पा रही हैं। इसको देखते हुए पीएफसी (पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन) और आरईसी को 25 प्रतिशत कार्यशील पूंजी सीमा से अधिक कर्ज देने की अनुमति दी गयी है। इससे राज्यों की वितरण कंपनियों के पास नकदी बढ़ेगी।
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उन्होंने कहा, ”कार्यशील पूंजी सीमा पिछले साल की आय का 25 प्रतिशत है। अब इस सीमा में ढील दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई में कोविड-19 राहत पैकेज तहत नकदी संकट और कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये ‘लॉककडाउन के कारण मांग में कमी से जूझ रही वितरण कंपनियों को 90,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध कराये जाने की घोषणा की थी। हालांकि कुछ वितरण कंपनियां पैकेज के तहत कर्ज लेने के लिये पात्र नहीं थी क्योंकि वे उदय योजना के अंतर्गत कार्यशील पूंजी सीमा नियमों को पूरा नहीं कर रही थी। उदय योजना के तहत बैंक और वित्तीय संस्थान वितरण कंपनियों की पिछले साल की आय के 25 प्रतिशत तक कार्यशील पूंजी कर्ज दे सकते थे।
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यह पाबंदी उदय योजना का हिस्सा थी। कर्ज में फंसी वितरण कंपनियों को पटरी पर लाने के प्रयास के तहत नवंबर 2015 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उदय योजना को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, वितरण कंपनियां पैकेज के तहत राज्यों से प्राप्त होने वाली राशि के एवज में कर्ज ले सकती थी ताकि वे बकाये का निपटान कर सके। लेकिन कुछ वितरण कंपनियों के पास दोनों प्रावधानों के अंतर्गत गुंजाइश नहीं थी। इसीलिए, बिजली मंत्रालय ने कार्यशील पूंजी सीमा नियम में ढील देने का प्रस्ताव किया ताकि ये वितरण कंपनियां पैकेज के तहत कर्ज ले सके और बकाये का भुगतान कर सके।







