भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा दी गई छह महीने की मोरेटोरियम अवधि 31 अगस्त को खत्म होने से ग्राहकों की आफत बढ़ गई है। कोरोना संकट के बीच नौकरी खोने और वेतन कटौती का सामाना कर रहे लाखों लोगों को इस समय लोन की ईएमआई (मासिक किश्त) चुकाना मुश्किल होगा।
‘हिन्दुस्तान’ की ओर से लोन की ईएमआई चुकाने को लेकर पूछे गए सवालों पर नौकरी पेशा, छोटे कारोबारी और आम लोगों ने कहा कि मोरेटोरियम खत्म होने से उनकी चिंता एकदम से बढ़ गई है। कोरोना के कारण आय घटने या वेतन कटौती से ईएमआई भरना मुश्किल होगा। अगर, वह लोन की ईएमआई नहीं चुका पाएंगे तो उनका सिबिल स्कोर खराब होगा जिससे आगे उनको लोन मिलना मुश्किल होगा। अगर लोन की ईएमआई चुकाने की कोशिश करेंगे तो घर चलाने के लिए जरूरी वित्तीय जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होगा। लोन रिस्ट्रक्चरिंग करने का अधिकार भी बैंकों को ही दिया गया है। ऐसे में इसका लाभ सभी को मिलना मुश्किल होगा। कुल मिलाकर संकट बढ़ने वाली है। इससे राहत देने के लिए सरकार को मोरेटोरियम की अवधि बढ़ाने और उसपर लगने वाले ब्याज में राहत देनी चाहिए।
कंपनियां दिवालिया व बेरोजगारी बढ़ने का खतरा
जानेमाने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार ने हिन्दुस्तान को बताया कि कोरोना संकट के चलते बीते पांच महीने से लाखों छोटी कंपनियां बंद है। लॉकडाउन में ढील के बाद भी उनमें से बहुत सारी कंपनियों में काम शुरू नहीं हो पाया है। जिनमें काम हो रहा है वह अपनी पूरी क्षमता का 40 से 50 फीसदी ही इस्तेमाल कर पा रही हैं। इसकी वजह मांग में भारी कमी है। इस बीच लोन की ईएमआई शुरू होने से बहुत सारी कंपनियों का दिवालिया होने का खतरा है। कंपनियां दिवालिया होने से बेरोजगारी बढ़ेगी जिसकी मार आम आदमी पर पड़ेगा। वो अपनी लोन की ईएमआई नहीं चुका पाएंगे। इससे बैंकों का एनपीए बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाएगी।
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कोविड बॉन्ड जारी कर पैसा जुटाए सरकार
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को तेज करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए सरकारी खर्च बढ़ाने की जरूरत है। यह काम सरकार कोविड बॉन्ड जारी कर जुटा सकती है। बैंक अभी करीब आठ लाख करोड़ रुपये आरबीआई के पास रखे हुए हैं। उसपर तीन फीसदी का ब्याज उन्हें मिल रहा है। अगर सरकार 3.5 फीसदी पर कोविड बॉन्ड जारी कर दे तो वह आठ लाख करोड़ रुपये का उठा सकती है। इसी तरह से वह अमीरों से भी पैसा जुटा सकती है। सरकार को अभी रोजगार बढ़ाने के लिए 12 से 14 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे जो अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद करेंगे।
बैंकों की लोन के मूलधन पर मोहलत देने की योजना
छोटे कर्जधारकों और एमएसएमई को बैंकों की ओर से छह महीने तक लोन के मूलधन चुकाने से राहत मिल सकती है। बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि 1 सितंबर से मोरेटियम खत्म होने के बाद लोन रिस्ट्रक्चरिंग के तहत यह राहत देने की योजना है। हालांकि, इसका लाभ सभी को मोरेटोरियम जैसा नहीं मिलेगा। बैंक अपने आकलन के आधार पर तय करेंगे कि किसको इसकी जरूरत है उसे ही वह मूलधन चुकाने में राहत देंगे। बैंक 2.1 लाख करोड़ रुपये के एनपीए को रिस्ट्रक्चरिंग करने की तैयारी में हैं। वहीं, 8.4 लाख करोड़ रुपये के लोन को बैंक रिस्ट्रक्चरिंग करेंगे।
ईएमआई पर छूट दो साल तक बढाई जा सकती है: केंद्र
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि लोन मोरेटोरियम की अवधि दो साल तक बढ़ाई जा सकती है। भारत सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कर्ज के भुगतान पर मोराटोरियम दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अदालत में पहले ही इस मामले में तीन बार सुनवाई टाल चुकी है। अदालत ने एक कहा कि सरकार को इस मामले में फेयर रहना होगा। पिछले हफ्ते भी इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के प्रति सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि लोन मोरेटोरियम के मामले में वह अपना रुख स्पष्ट करने के लिए जल्द हलफनामा दे और रिजर्व बैंक के पीछे छुपकर अपने को बचाये नहीं।
बैंकों से तीन को चर्चा करेंगी वित्तमंत्री
कोरोना महामारी से प्रभावित कर्जधारकों को बकाया भुगतान पर सहूलियत देने को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण तीन सितंबर को बैंक प्रमुखों के साथ बैठक करेंगी। इसमें बैंक-एनबीएफसी को योजना सुचारू रूप से लागू करने को कहा जाएगा। यह समीक्षा बैठक कारोबारियों और व्यक्तिगत कर्जधारकों को पूंजी संकट से बचाने के लिए होगी। इसमें नीतियों का अंतिम प्रारूप बनाने और बैंकों में इसे सही तरीके से लागू करने, योग्य कर्जधारकों की पहचान करने के अलावा योजना को तेज और समग्र रूप से लागू करने पर चर्चा की जाएगी।
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मोरेटोरियम और रीस्ट्रक्चरिंग में क्या अंतर
मोरेटोरियम में ईएमआई न चुकाने की छूट थी। इस दौरान जो भी ब्याज बनता, वह बैंक आपके मूल धन में जोड़ देते। जब ईएमआई शुरू होगी तो आपको पूरी बकाया राशि पर ब्याज चुकाना होगा। वहीं,लोन का रीस्ट्रक्चरिंग इससे पूरी तरह अलग है। इसमें बैंक तय कर सकेंगे कि ईएमआई को घटाना है, लोन का पीरियड बढ़ाना है, सिर्फ ब्याज वसूलना है, या ब्याज दर कम करना है।
आम आदमी पर बढ़ेगा नकदी संकट
मोरेटोरियम खत्म करने का सबसे बुरा असर मध्यमवर्ग पर पड़ने की आशंका है। कोरोना संकट के कारण अभी भी विमानन, पर्यटन, हास्पीटल, मॉल, रियल एस्टेट जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। इन सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोग ने अपनी नौकरी गंवाई हैं। वहीं, दूसरे सेक्टर में लोगों को छंटनी और वेतन कटौती का सामना करना पड़ा है। लोन की ईएमआई शुरू होने के बाद आम आदमी के बीच नकदी संकट गहराएगा।
बैंक नहीं चाहते मोरेटोरियम बढ़ाना
एचडीएफसी लिमिटेड के चेयरमैन दीपक पारेख, कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी उदय कोटक और एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार समेत कई बैंकर्स ने आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास से मोरेटोरियम अवधि नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया है। इनका कहना है कि कई लोग इस सुविधा का अनुचित लाभ ले रहे हैं। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी मोरेटोरियम बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। बैंकर्स का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने और सुगमता के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। अस्थायी उपायों के जरिए कर्ज लेने वालों की समाधान नहीं हो सकता है।
कोरोना के बाद लोगों को बैंकिंग सेक्टर द्वारा दी गई राहत
संस्थान कुल लोन में मोरेटोरियम की हिस्सेदारी (%)
सरकारी बैंक 80
निजी बैंक 33.6
विदेशी बैंक 21.1
स्मॉल फाइनेंस बैंक 73.2
शहरी सहकारी बैंक 62
एनबीएफसी 45.9
कुल 55.3







