बॉम्बे हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपए के यस बैंक धोखाधड़ी मामले में धन शोधन के आरोपी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रवर्तकों कपिल वधावन और धीरज वधावन को गुरुवार को जमानत दे दी। जमानत मिलने के बावजूद दोनों भाई फिलहाल जेल में ही रहेंगे क्योंकि केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इसी मामले में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने वधावन बंधुओं को इस आधार पर जमानत दी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनके खिलाफ 60 दिन की अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाया है। अदालत ने कहा कि कानून में आरोप पत्र दायर करने के लिये तय अवधि बताई गई है और वह अवधि पूरी होने के बाद आरोपी को एक दिन भी हिरासत में नहीं रखा जा सकता और वह ‘स्वाभाविक जमानत’ मांग सकता है।
एक-एक लाख का मुचलका भरने का आदेश
यदि जांच एजेंसी अभियुक्त के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 167 के तहत निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दायर करने में विफल रहती है, तो अभियुक्त स्वाभाविक जमानत मांग सकता है। अदालत ने दोनों आरोपियों को एक-एक लाख का मुचलका भरने और अपना पासपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत से दो हफ्ते तक अपने आदेश पर रोक जारी रखने का अनुरोध किया, ताकि एजेंसी उच्चतम न्यायालय में अपील कर सके। हालांकि न्यायमूर्ति डांगरे ने इस अनुरोध को खारिज करते हुए कहा जब आरोपी के पास स्वाभाविक जमानत मांगने का अधिकार बचा हो, तब उसे एक दिन भी हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर के खिलाफ दाखािल है चार्जशीट
अदालत ने दोनों आरोपियों को एक-एक लाख का मुचलका भरने और अपना पासपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए। आरोपियों ने 60 दिन के नियत वक्त तक ईडी द्वारा आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने का दावा करते हुए जमानत की मांग की थी। ईडी ने धनशोधन मामले में 14 मई को उन्हें गिरफ्तार किया था। गौरतलब है कि ईडी ने 15 जुलाई को वधावन, यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर, उनकी पत्नी बिंदू कपूर, बेटियों रोशनी और रेखा और उनकी चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनी दुलारेश के जैन एंड एसोसिएट के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।







