स्वराज इंडिया के अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेता योगेंद्र यादव ने शनिवार को दिल्ली की सीमाओं पर स्थित किसानों के चार प्रदर्शन स्थलों की तुलना हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल चारधाम से की। तीनों कृषि कानूनों की वापसी और अन्य सभी मांगों को मोदी सरकार की ओर से स्वीकार किए जाने के बाद ‘विजय दिवस’ मना रहे किसानों को संबोधित करते हुए गाजीपुर बॉर्डर पर योगेंद्र यादव ने कहा कि यह दिन भाषण का नहीं है। किसानों ने जो कहा वह करके दिखाया। लगे हाथ उन्होंने प्रदर्शनस्थलों को चारधाम जैसे तीर्थ स्थल भी बता डाला।

योगेंद्र यादव ने कहा, ”अब हम नहीं बोलेंगे, बल्कि किताबें और इतिहास बोलेगा। पूरा देश बोलेगा। आज का दिन यह याद रखने का है कि पिछले एक साल में हमारे देश में चारधाम का मतलब बदल गया था। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु तक से लोग आते थे और कहते थे कि वे चार जगहों की यात्रा करना चाहते हैं, सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, शाहजहांपुर बॉर्डर, ये (प्रदर्शन स्थल) देश के लिए चारधाम बन गए थे।” 

यादव ने कहा कि ये स्थान दो-तीन दिनों में खाली हो जाएंगे, लेकिन इन जगहों के नाम लोगों के दिलों में बसे रहेंगे। उन्होंने कहा कि अब से जब भी लोग चंपारण आंदोलन को याद करेंगे ‘दिल्ला का मोर्चा’ भी याद करेंगे। जब भी लोग कहेंगे कि देश ने संविधान को 26 नवंबर को स्वीकार किया था, वे यह भी याद करेंगे कि किसान दिल्ली में 26 नवंबर को याए ते। यादव ने आगे कहा, ”जब भी लोग जलियांवालाबाग के नरसंहार को याद करेंगे, वे लखीमपुर खीरी की बर्बर हत्याओं को भी याद करेंगे। देश जब भी रेजांग ला की लड़ाई को याद करेगा, वह 28 फरवरी को गाजीपुर की लड़ाई को भी याद करेगा।”



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