कोरोना से पहले 10 से 13 रुपये प्रति किलो वाले रद्दी कागज की कीमतें आज 22 से 24 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई हैं, लेकिन हो सकता है आपसे रद्दी वाला पुराने ही रेट पर खरीद रहा हो। घरों से रद्दी कागज आज भी 10 से 12 रुपये किलो पर ही लिया जा रहा है, लेकिन रद्दी कागज की आपूर्ति करने वालों ने अवैध तरीके से जमाखोरी करते हुए पेपर मिल्स के लिए इनकी कीमतें बढ़ा दी हैं। 

आईएआरपीएमए के प्रेसिडेंट प्रमोद अग्रवाल ने कहा, ‘इससे उद्योग पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। क्राफ्ट वेस्ट पेपर की कीमतें भी 22 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई हैं, जो कोरोना से पहले की अवधि में 10 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थीं। आईएआरपीएमए ने रद्दी कागज की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि के लिए रद्दी कागज की आपूर्ति करने वालों की जमाखोरी और कार्टेलाइजेशन को जिम्मेदार ठहराया है।

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अग्रवाल ने कहा, ‘कुछ रद्दी कागज आपूर्तिकर्ता इसकी उपलब्धता और कीमत पर नियंत्रण कर रहे हैं और इस कारण से पेपर मिल्स के समक्ष अपना उत्पादन घटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि कच्चे माल की उपलब्धता कम हो गई है।’  उन्होंने कहा कि पेपर मिल्स कच्चे माल की कीमतों में प्रति किलो 10 रुपये तक की वृद्धि को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं और इसलिए फिनिश्ड न्यूजप्रिंट और अन्य ग्रेड के कागजों की कीमतें भी इसी अनुपात में बढ़ने का खतरा है। साथ ही पेपर मिल्स अपना कारोबार बंद करने की स्थिति में भी नहीं हैं, क्योंकि उन्हें ब्याज एवं वेतन समेत कई खर्च पूरे करने हैं।

रद्दी कागज की कीमतें पिछले छह महीने में दोगुनी

इंडियन एग्रो एंड रिसाइकिल्ड पेपर मिल्स एसोसिएशन (आईएआरपीएमए) के मुताबिक देश में कुल पेपर एवं पेपरबोर्ड प्रोडक्शन में 65 से 70 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी रखने वाली रीसाइकिल्ड फाइबर यानी रद्दी कागज पर आधारित पेपर मिल्स अप्रत्याशित संकट का सामना कर रही हैं। इनके प्रमुख कच्चे माल यानी रद्दी कागज की कीमतें पिछले छह महीने में दोगुनी हो गई हैं।

रद्दी कागज के स्टॉक केंद्रों पर मारे जाएं छापे

वाणिज्य मंत्रालय को लिखे पत्र में आईएआरपीएमए ने कहा कि देश में सालाना 2.5 करोड़ टन कागज का उत्पादन होता है और इसमें से करीब 1.7 करोड़ टन कागज का उत्पादन रद्दी कागज आधारित पेपर मिल्स करती हैं। रद्दी कागज की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कागज उत्पादन में किसी भी तरह की कमी से राइटिंग, प्रिंटिग, न्यूजप्रिंट और पैकेजिंग इंडस्ट्री पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। आईएआरपीएमए ने आरोप लगाया कि कुछ निहित स्वार्थों के कारण कृत्रिम तरीके से रद्दी कागज की कमी का माहौल बनाया जा रहा है। आईएआरपीएमए ने सरकार से हस्तक्षेप करने और गोदामों व रद्दी कागज के स्टॉक केंद्रों पर छापे मारकर अवैध जमाखोरी पर नियंत्रण की अपील की है। आईएआरपीएमए ने सरकार को अवैध तरीके से रद्दी कागज की जमाखोरी करने वालों के नाम बताने का प्रस्ताव भी दिया है। 



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