विश्व की सोशल मीडिया की अग्रणी फेसबुक ने मुकेश अंबानी के जियो प्लैटफॉर्म्स में 9.99 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी के लिये 43574 करोड रुपये का भुगतान कर दिया है।रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मंगलवार को शेयर बाजारों को इस बाबत सूचना भेजी है। दोनों के बीच निवेश का ऐलान 22 अप्रैल को हुआ था और 24 जून को इस पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग(सीसीआई) की मुहर लगी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा, ” सभी आवश्यक नियामक स्वीकृति मिलने के बाद कंपनी की अनुषंगी इकाई जियो प्लेटफार्म्स लिमिटेड को फेसबुक की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई जाधू होल्डिंग्स, एलएलसी से 43,574 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो गई है।” फेसबुक ने जियो प्लेटफार्म्स में 4.62 लाख करोड़ रुपये की उद्यम कीमत पर 9.99 फीसदी हिस्सेदारी ली है।

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फेसबुक के जियो प्लैटफॉर्म्स में निवेश के ऐलान के बाद कंपनी में धन लगाने वालों का तांता लग गया। फेसबुक के अलावा दस निवेशकों के ग्यारह निवेश प्रस्तावों से जियो प्लैटफॉर्म्स में कुल 25.09 प्रतिशत इक्विटी के लिये एक लाख 17 हजार 588 करोड 45 लाख रुपए  निवेश का ऐलान हुआ। इक्विटी बिक्री के बाद भी जियो प्लैटफॉर्म्स रिलायंस की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई बनी रहेगी।

किस कंपनी ने कितना कया निवेश, देखें यहां

कंपनी डील की घोषणा निवेश करोड़ रुपये में

जियो में हिस्सेदारी (%)

फेसबुक 22 अपैल 43574 9.99
सिल्वर लेक 4 मई 5655.75 1.15
विस्ता पार्टनर 8 मई 11367 2.32
जनरल अटलांटिक 17 मई 6598.38 1.34
केकेआर 22 मई 11367 2.32
मुबाडाला 5 जून 9,093.60 1.85
सिल्वर लेक 5 जून 4,546.80 0.93
अबु धाबी इन्वेस्टमेंट ​अथॉरिटी 7 जून 5683.5 1.16
टीपीजी 14 जून 4,546.80 0.93
एल केटरटन 13 जून 1894.5 0.39
पीआईएफ 18 जून 11,367 2.32
इंटेल 3 जुलाई 1894.5 0.39
    117588.83 25.09

चार वर्ष से भी कम समय में मुकेश की रिलायंस जियोहले अन्य दूरसंचार कंपनियों को पीछे धकेल कर पहले नंबर पर आ गई और इसके 38 करोड से अधिक ग्राहक हैं। मुकेश अंबानी ने जियो प्लैटफॉर्म्स में निवेश और रिलायंस इंडस्ट्रीज के तीन दशक में लाये गये राईट्स इश्यू को मिले जोरदार समर्थन के बाद समूह को लक्ष्य से नौ माह पहले 19 जून को पूरी तरह से कर्जमुक्त होने का ऐलान किया था। अंबानी ने 12 अगस्त 2019 को आरआईएल को मार्च 2021 तक रिणमुक्त करने का लक्ष्य तय किया था और इस वर्ष 31 मार्च तक समूह पर एक लाख 61 हजार 35 करोड रुपए का शुद्ध रिण था। समूह कर्ज की तुलना में अधिक रकम जुटा चुका है।





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