मॉस्को
रूस की पहली संभावित कोरोना वायरस वैक्सीन Sputnik V का बड़ी संख्या में ट्रायल अगले हफ्ते से शुरू होगा। इसमें 40 हजार लोग शामिल होंगे। एक विदेशी रिसर्च बॉडी के तत्वाधान में ये टेस्ट होंगे। दरअसल, वैक्सीन को लेकर दुनिया के कई देशों, खासकर पश्चिम ने, रूस पर सवाल खड़े किए हैं और डेटा को लेकर असंतुष्टि जताई है। इस वैक्सीन का नाम दुनिया की पहली आर्टिफिशल सैटलाइट Sputnik पर रखा गया है और रूस के एक्सपर्ट्स ने कहा है कि जैसे तब दुनिया रूस की सफलता से हैरान थी, अब वैक्सीन पर भी उसका शक उसी वजह से है।

WHO को दिया जाएगा डेटा
रूसी डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड के हेड किरिल दिमित्रीव ने बताया है कि वैक्सीन का डेटा इस महीने के आखिर में एक अकैडमिक जर्नल में छपेगा। उन्होंने बताया है कि रूस के बस एक अरब खुराकों का ऑर्डर आ चुका है और उसके पास 50 करोड़ खुराकें बनाने की क्षमता है। वैक्सीन तैयार करने वाले मॉस्को के गमलेया इंस्टिट्यूट के मुताबिक 40 हजार लोगों पर 45 सेंटर्स पर टेस्ट किया जाएगा। दिमित्रीव ने बताया कि WHO को डेटा दिया जाएगा।


‘कई देशों को ट्रायल में दिलचस्पी’
उन्होंने बताया है कि UAE, भारत, ब्राजील, सऊदी अरब और फिलिपींस समेत कई देश आखिर चरण के ट्रायल में हिस्सा लेने का विचार कर रहे हैं। इसे घरेलू रेग्युलेटरी अप्रूवल मिल चुका है जिसके बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे इसे लाइसेंस देने का ऐलान भी कर दिया था। हालांकि, इसे आखिरी चरण के ट्रायल से पहले ही अप्रूवल दिए जाने को लेकर काफी सवाल उठे हैं।


पहले अप्रूव करने का है फायदा

दिमित्रीव का कहना है कि जल्दी अप्रूवल देने से ज्यादा खतरे का सामना कर रहे हेल्थ-केयर वर्कर्स जैसे समूहों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यह ऐच्छिक होगा और जो लोग इसका इस्तेमाल करेंगे उनका बराबर चेक अप भी होगा। उन्होंने बताया है कि ट्रायल का सुपरविजन विदेश का क्लिनिकल रिसर्च संगठन करेगा ताकि डेटा अंतरराष्ट्रीय मानकों में है, यह सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि, यह कौन सा संगठन है यह उन्होंने नहीं बताया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

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