दुनियाभर के देशों को पीछे छोड़ते हुए रूस ने Coronavirus की पहली वैक्सीन को लॉन्च कर दिया। इस पर दुनिया सवाल करती रही लेकिन रूस ने अब दूसरी वैक्सीन EpiVacCorona भी तैयार कर ली है। उसका दावा है कि इस वैक्सीन में कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है, जिसे लेकर पहली वाली वैक्सीन की आलोचना हो रही थी। इस वैक्सीन को जिस लैब में बनाया गया है उसका इतिहास कहीं ज्यादा रोचक है।(सभी फोटो: साइबेरियन टाइम्स)

टॉप वायरॉलजी इंस्टिट्यूट

रूस अपनी दूसरी कोरोना वायरस वैक्सीन EpiVacCorona टॉप-सीक्रेट सोवियत बायॉलजिकल हथियारों के रिसर्च प्लांट में साइबेरिया में बना रहा है जो अब दुनिया का सबसे टॉप वायरॉलजी इंस्टिट्यूट है। साइबेरिया के वेक्टर स्टेट रिसर्च सेंटर ऑफ वायरॉलजी ऐंड बायोटेक्नॉलजी अमेरिका के अलावा दूसरी ऐसी जगह है जहां खतरनाक स्मॉलपॉक्स का स्टॉक रखा जाता है।

हथियार बनाता था सोवियत संघ

वेक्टर पहले सोवियत के खुफिया और अवैध जैविक हथियारों के प्रोग्राम की फसिलटी हुआ करता था। इसे 1973 में सोवियत संघ के नेता लियोनिड ब्रेजिनेव (Leonid Brezhnev) ने सेट अप किया था। यहां औद्योगिक स्तर पर स्मॉलपॉक्स का उत्पादन किया जाता था। यही नहीं, यहां खतरनाक Marburg तक को हथियार के रूप में तैयार किया जाता था। Marburg दुनिया के सबसे घातक वायरस में से एक है जिससे हीमराजिक फीवर हो सकता है।

इलाज खोजने में जुटी लैब

टॉप-सीक्रेट सोवियत बायॉलजिकल हथियारों का रिसर्च प्लांट रह चुका वेक्टर कोरोना वायरस की 13 वैक्सीनों पर काम कर रहा है जिनका लैब में जानवरों पर टेस्ट किया गया है। हाल के वक्त में वेक्टर बूबॉनिक प्लेग, ऐंथ्रैक्स, इबोसा, हेपेटाइटिस बी, HIV, SARS और कैंसर का इलाज और ऐंटीडोट ढूंढने पर काम कर रहा है।

दुनिया को रूस का जवाब

अब तक रूस ने वैक्सीन इतनी जल्दी कैसे बना ली, इसे लेकर पश्चिम सवाल कर रहा था। इस पर देश के एक्सपर्ट्स ने जवाब दिया है कि देश में 20 साल से वायरस पर रिसर्च चल रही थी। इसलिए उन्हें पहले से मिले नतीजों की मदद से वैक्सीन तैयार करने में मदद मिली।

वहीं, देश में बनी रहीं वैक्सीनों को लेकर रूस के इंडस्ट्री ऐंड ट्रेड मिनिस्टर डेनिस मान्टुरोव ने बताया है कि देश साल के आखिर तक हर महीने कोविड-19 वैक्सीन की 15 से 20 लाख खुराकों का हर महीने उत्पादन करने लगेगा और फिर हर महीने 60 लाख खुराकें बनाई जाएंगी। रूस की तीन कंपनियां- Binnofarm, R-Pharm और Generium वैक्सीन बनाएंगी और अगस्त के आखिर तक 30 हजार खुराकें बन जाने की उम्मीद है।



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