लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सोमवार को भारत-चीन के बीच हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद संयुक्त बयान जारी किया गया है। भारत-चीन के इस संयुक्त बयान में बताया गया है कि दोनों देशों के बीच एलएसी के हालात को स्थिर करने पर चर्चा हुई है। इसके अलावा, दोनों ने और अधिक सैनिकों की तैनाती नहीं करने पर सहमति जताई है। एलएसी पर अप्रैल महीने से तनाव की स्थिति कायम है, जिसे कम करने के लिए सोमवार को छठे दौर की बातचीत हुई थी। 

कोर कमांडर स्तर की छठे दौर की वार्ता के बाद भारत-चीन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा, ”21 सितंबर को, भारत और चीन के वरिष्ठ कमांडरों के बीच कोर कमांडर स्तर की छठवें दौर की बैठक को आयोजित किया गया। उनके बीच एलएसी के हालातों को स्थिर करने को लेकर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श साझा हुए।”

संयुक्त बयान में आगे कहा गया, ”भारत और चीन की सेनाएं आपस में संपर्क मजबूत करने और गलतफहमी तथा गलत निर्णय से बचने पर सहमत हुईं हैं। इसके अलावा, दोनों पक्ष अग्रिम मोर्चे पर और अधिक सैनिक न भेजने, जमीनी स्थिति को एकतरफा ढंग से न बदलने पर सहमत हुए हैं।” बयान में आगे कहा गया कि भारतीय और चीनी सेना ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचने के लिए सहमत हैं जो स्थिति को जटिल बना सकती हैं।

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भारत और चीन के बीच सोमवार को कोर कमांडर स्तर की बातचीत तकरीबन 13 घंटे तक चली। इस दौरान, पूर्वी लद्दाख में अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित टकराव बिंदुओं के पास तनाव कम करने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया। वहीं, सरकारी सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ‘भाषा’ को बताया था कि वार्ता के दौरान भारतीय पक्षों ने सभी टकराव बिंदुओं से चीनी बलों को शीघ्र एवं पूरी तरह हटाए जाने पर जोर दिया। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि तनाव कम करने के लिए पहले कदम चीन को उठाना है।

ऐसा समझा जाता है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 10 सितंबर को मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर तथा उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुए समझौते को निश्चित समय-सीमा में लागू करने पर जोर दिया गया था। कोर कमांडर स्तर की छठे दौर की यह वार्ता पूर्वी लद्दाख में भारत के चुशूल सेक्टर में एलएसी के पार मोल्डो में चीनी क्षेत्र में सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और रात 11 बजे समाप्त हुई।

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विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव भी थे हिस्सा

विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। वह सीमा विषयक परामर्श एवं समन्वय कार्य प्रणाली (डब्ल्यूएमसीसी) की रूपरेखा के तहत चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर राजनयिक वार्ता में शामिल रहे हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में लेफ्टिनेंट जनरल पी जी के मेनन भी शामिल थे, जो अगले महीने 14वीं कोर कमांडर के तौर पर सिंह का स्थान ले सकते हैं। इससे पहले, कोर कमांडर स्तर की वार्ता के पांच दौर में भारत ने चीनी सैनिकों की यथाशीघ्र वापसी तथा पूर्वी लद्दाख के सभी क्षेत्रों में अप्रैल से पहले वाली स्थिति की बहाली पर जोर दिया था।

भारत ने चीनी घुसपैठ को कर दिया था नाकाम

पूर्वी लद्दाख में स्थिति तब बिगड़ी, जब चीन ने 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा करने की विफल कोशिश की। सात सितंबर को पैंगोग झील के दक्षिणी तट पर रेजांग-ला रिजलाइन के मुखपारी में चीनी सैनिकों ने भारतीय ठिकाने के निकट जाने का विफल प्रयास किया और हवा में गोलियां चलाईं। भारत ने पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर कई पर्वत चोटियों पर तैनाती की और किसी भी चीनी गतिविधि को नाकाम करने के लिए क्षेत्र में फिंगर 2 तथा फिंगर 3 इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।



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