Edited By Arun Kumar | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

हाइलाइट्स

  • चीन की हर आक्रामक नीति का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर रहा भारत
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तेजी के साथ सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर
  • हिन्द महासागर में चीन को घेर कर उसे अधिक दबाव में ला सकेगा भारत

रजत पंडित, नई दिल्ली

लद्दाख में चीन ने अपनी विस्तारवादी नीयत दिखाकर भारत को अब हर मोर्चे पर अलर्ट रहने के लिए जगा दिया है। चीन हिंद महासागर (IOR) क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने के अवसर ढूंढता रहता है। लेकिन अब भारत सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक फास्ट ट्रैक योजना के साथ यहां अपनी सैन्य शक्ति को और मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। भारत की योजना है कि वह यहां पर जरूरत के सभी संसाधन जल्द से जल्द जुटा ले ताकि जरूरत पड़ने पर यहां भी प्रभावी रूप से चीन का सामना किया जा सके।

रक्षा सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि चीन के आक्रामक और विस्तारवादी व्यवहार के बाद इस बात को जोर देने की जरूरत है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में शीघ्रता से अपनी ‘सैन्य ताकत’ और ‘मिलिट्री विकास के संसाधन’ बढ़ाने पर जोर दिया जाए। ये योजनाएं कई सालों से लंबित पड़ी हैं। चीन 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) पर भी अपनी बुरी नजर रखता है।

अंडमान और निकोबार कमांड 2001 में बनाई गई थी। यह देश की पहली और एकमात्र कमांड है, जो एक ही ऑपरेशनल कमांडर के अधीन जमीन, समुद्र और एयर फोर्स के साथ काम करती है। लेकिन लंबे समय से इस पर ध्यान नहीं दिया गया है और फंड्स की कमी, संसाधनों के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी ने इसे खुद को ठोस बनाने से बार-बार रोका है।

लेकिन अब यह बीती बात हो सकती है। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रही तनातनी ने रक्षा से जुड़े सभी पहलुओं को फिर से चेक करने पर जोर दिया है। चीन के साथ समुद्री सीमा पर नजर रखने के लिए एएनसी (अंडमान और निकोबार कमांड) की भूमिका काफी अहम है। चीन के लिए भी यह सीमारेखा अहम है क्योंकि वह अपने कच्चे तेल का आयात और दूसरी चीजों का व्यापार मालाका स्ट्रेट के रूट से ही करता है। अगर भारत यहां अपनी ताकत बढ़ाता है कि तो जरूरत पड़ने पर चीन को इस मोर्चे पर घेरकर उस पर दबाव बनाया जा सकता है।

एक सूत्र ने बताया, ‘एएनसी पर अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाए भी जा चुके हैं, जबकि बाकी की जरूरी योजनाएं अंतिम चरण में हैं।’ उत्तरी अंडमान में शिबपुर में आईएनएस कोहासा पर रनवे की लंबाई बढ़ाने के लिए जमीन का आवंटन और जरूरी मंजूरी अभी हाल ही में मिल चुकी है। सेना की योजना है कि आईएनएस कोहासा और दक्षिण द्वीपों की कैंबेल खाड़ी में आईएएस बाज समेत दोनों रनवे की लंबाई को 10,000 फीट तक बढ़ाया जाए, जिससे यहां बड़े विमानों के संचालन में मदद मिल सके।



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