कोरोना वायरस महामारी ने हमारे जीने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। वर्क फ्रॉम होम यानि घर से काम करना अब आम हो चला है। धीरे धीरे ही सही हमने खुद को इसमें ढाल लिया है। इसके अपने फायदे और नुक्सान हैं। काम करने की क्षमता तो बढ़ी ही है लेकिन उसके साथ स्ट्रेस भी बढ़ा है। फोन पर लगातार चैट करने के बावजूद हम अकेला महसूस करते हैं। अच्छा और स्वस्थ वर्क फ्रॉम होम माहौल बनाने के लिए विशेषज्ञ तरह तरह की सलाह देते हैं लेकिन हम अभी भी अपनी लय ढूंढ रहे हैं। इस लेख में देशभर से प्रोफेशनल्स ने अपने प्रोडक्टिविटी और खुद का ध्यान रखने के अनुभव साझा किए हैं।   

टाइम टेबल है जरूरी

फिनटेक स्टार्टअप बेसिस की को फाउंडर हिना मेहता कहती हैं, मैं सुबह का उठना, तैयार होना, एक्सरसाइज, नाश्ता करना, और उसी समय खाना खाती हूं जैसे मैं लॉकडाउन के पहले करती थी। शुरुआत में इसका पालन करना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन धीरे धीरे आदत पड़ जाती है। 

सोनल कुमार नोएडा के एक स्कूल में टीचर हैं। वह बताती हैं कि शुरुआत में ऑनलाइन क्लासेस और बेटी की पढ़ाई में मदद के साथ घर के काम करना मुश्किल होता था। मेरे लिए टाइम टेबल बहुत जरूरी है। मैं वैसे ही काम करने की कोशिश करती हूं जैसे स्कूल में करती था। कॉपी चेक करने का टाइम, स्किल डेवलेपमेंट के लिए वेबिनार अटेंड करना, स्टूडेंट और अभिवावकों के साथ मीटिंग करना। हर चीज का समय तय कर दिया है। 

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अपनी जगह बनाइए

घर के बहुत से सदस्यों के लिए ऑफिस या ऑनलाइन क्लास करने के लिए अलग-अलग जगह बनाना मुश्किल हो सकता है। पूरे दिन बेड़ पर बैठे रहना या कुर्सी आरामदायक नहीं हो तो कमर दर्द या गर्दन दर्द की दिक्कतें हो सकती हैं। इन्हीं सब कारणों से अच्छे फर्नीचर, लाइटिंग पर खर्च करना लंबे समय के लिए अच्छा है।  

शीरोज में काम करने वाली मेरिल डिनिज कहती हैं, मेरे कमरे में मेरा एक छोटा सा होम ऑफिस है। काम खत्म करने के बाद मैं वहां की लाइट्स बदल देती हूं ताकि ऑफिस के बाद घर वाली वाइब्स आ सकें। 

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संगीत रखेगा ख्याल

डिनिज कहती हैं, कुछ रोजमर्रा के काम शोर में भी किए जा सकते हैं लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिनके लिए फोकस बहुत जरूरी होता है। चूंकि मैं लिखने का काम ज्यादा करती हूं इसलिए घर का शांत माहौल मेरी मदद करता है। 

मेहता कहते हैं, काम के साथ गाने चलाने से मैं ज्यादा फोकस रहता हूं। बैकग्राउंड में गाने, धूप की रोशनी और एक कप बढ़िया कॉफी काम में मेरी काफी मदद करते हैं। 

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सोशल हो जाइए

लगातार डिजिटल कम्युनिकेशन जितना जरूरी है उतना ही थकानभरा भी है। दीप्ती कहती हैं, कॉल के बीच में ब्रेक लेते रहें। खुले गार्डन या बालकनी में बैठने से भी मन अच्छा रहता है। इस समय में नई जगह में ज्वाइन करना मुश्किल होता है। बिना मिले कलीग्स के साथ घुलना मिलना मुश्किल है। 

लेकिन कोशिश की जाए तो अच्छे रिश्ते बन जाते हैं। समय-समय पर घर से बाहर निकलना भी जरूरी है। 

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