वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी दिख रही है। ने प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करने के दौरान कहा अर्थव्यवस्था में मजबूत सुधार है, कोविड-19 के सक्रिय मामलों में गिरावट आई है। अक्टूबर में जीएसटी संग्रह वर्ष दर वर्ष आधार पर 10 प्रतिशत बढ़ा,  बैंक ऋण में 5.1 प्रतिशत का सुधार हुआ और  ऊर्जा खपत में वृद्धि के रुझान मिले हैं। महामारी के समय में भी जीएसटी कलेक्शन और विदेशी निवेश बढ़ा है।

किसानों को नाबार्ड के जरिये इमरजेंसी कैपिटल फंड के  दिया जाएगा। डिस्कॉम और उद्योगों को कर्ज देने के लिए करीब 1,182,73 रुपये करोड़ 22 राज्यों को कर्ज बांटने के लिए वितरित किये गये हैं।

 

मई में आया था पिछला प्रोत्साहन पैकेज

मई में आया भारत सरकार का पिछला प्रोत्साहन पैकेज कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था को लगे झटके को मोटे तौर पर कम करने में पूरी तरह सफल नहीं हुआ था। इस पैकेज का फोकस तरलता बढ़ाने और छोटो कारोबारों को आसान ऋण उपलब्ध कराना था। लेकिन खर्च को बढ़ावा देने के लिए अधिक नहीं किया गया था। इस पैकेज में कोरोना से बुरी तरह प्रभावित सेक्टर जैसे टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन छूट गए थे। 

लॉकडाउन के दौरान 23.9 फीसदी संकुचन

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कुछ साल पहले ही इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) ने इशारा किया था कि यह दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में होगी। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से मार्च में लॉकडाउन की वजह से इसमें 23.9 फीसदी संकुचन हुआ।  देश के बड़े शहरों में कोरोना वायरस केस अभी भी तेजी से बढ़ रहे हैं और प्रतिदिन 40 हजार से अधिक केस आ रहे हैं।  हालांकि, पिछले तीन महीनों में पहली बार एक्टिव केस 5 लाख से कम हो गए हैं। सरकार ने अधिकतर प्रतिबंधों को हटा लिया है। 

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