नेताओं के घर में लगता है पैसे के पेड़ लगे हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो केवल चार साल में करीब 6 लाख की संपत्ति बढ़कर 7 करोड़ से अधिक नहीं होती। वहीं, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2012-13 में यूपी में प्रति व्यक्ति आय 33 हजार 137 रुपये थी। 2016-17 में बढ़कर सालाना प्रति व्यक्ति आय 43 हजार 861 रुपये हो गई। यानी 5 साल में आम आदमी की आय में करीब 32 फीसद बढ़ी।  साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में कुल 80 फीसद विजेता करोड़पति थे। 

केवल चार साल में ही 12083 फीसद की उछाल

एडीआर की वेबसाइट माय नेता डॉट इंफो पर दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 2012 में चुनाव जीत चुके उम्मीदवारों की संपत्ति 2017 तक आते-आते 2632 फीसद तक बढ़ गई। इसमें विश्वनाथगंज से अपना दल विधायक राकेश कुमार की संपत्ति में केवल चार साल में ही 12083 फीसद की उछाल आ गई। उन्होंने 2013 का उपचुनाव जीता था और उस समय उन्होंने अपनी संपत्ति 5.97 लाख दिखाई थी। एक बार फिर राकेश 2017 में चुनाव मैदान में उतरे और संपत्ति दिखाई 7.27 करोड़।

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संपत्ति में उछाल के मामले में अकेले राकेश कुमार ही नहीं हैं। इन्हीं के हमनाम छर्रा के सपा विधायक की संपत्ति पांच साल में 2632 फीसद बढ़ गई। 2012 के चुनाव में इनकी संपत्ति थी 4.79 लाख, जो 2017 तक आते-आते 1.31 करोड़ से अधिक हो गई। सबसे ज्यादा संपत्ति अर्जित करने के मामले में सुल्तानपुर के इसौली विधानसभा सीट से सपा विधायक अबरार अहमद भी हैं। 2012 में भी इसौली सीट से विधायक रहे और उस समय इनकी संपत्ति थी 2.90 लाख। साल 2017 में इन्होंने जब इन्होंने अपनी संपत्ति डिक्लेयर की तो 5 साल में यह बढ़कर 70.97 लाख रुपये हो गई। यानी कुल 2348 फीसद का इजाफा।

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गोरखपुर जिले खजनी सीट से बीजेपी विधायक संत प्रसाद की संपत्ति भी 2012 से 2017 के बीच 1047% बढ़ी। साल 2012 के चुनाव में जब उन्होंने इसी सीट से बीजेपी के टिकट पर ताल ठोंकी थी ते उस समय इनकी संपत्ति महज 14.18 लाख थी, जो 2017 में बढ़कर 1.62 करोड़ हो गई।

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पूर्वांचल की कुशीनगर सीट से पीछली बार चुनाव में हार का मुंह देखने वाले सपा के विधायक ब्रह्माशंकर त्रिपाठी की भी संपत्ति 2012 से 2017 के बीच 803 फीस उछल कर 2.94 करोड़ से 26.63 करोड़ हो गई। 

कैंपियरगंज के बीजेपी विधायक फतेहबहादुर 2012 का चुनाव जीतकर विधायक बने और साल 2017 में उन्हें बीजेपी के टिकट पर विजयश्री मिली। मायनेता के मुताबिक इन 5 सालों में इनकी संपत्ति  में 138 फीसद का इजाफा हुआ। 2012 में इनकी संपत्ति 3.29 करोड़ थी, जो 2017 तक आते-आते बढ़कर 7.82 करोड़ हो गई।  

इनकी संपत्ति बढ़ने के बजाय घटी

ऐसा नहीं है कि सभी विधायाकों की संपत्ति बढ़ी ही है। कुछ ऐसे भी हैं, जिनकी संपत्ति 5 साल में घटकर एक चौथाई से भी कम रह गई। इस लिस्ट में सबसे ऊपर नाम है, संत कबीर से 2012 में विधायक रहे पीस पार्टी के डॉ. अयूब का। डॉ अयूब साल 2017 के चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। 2012 से 2017 के बीच उनकी संपत्ति 82 फीसद घटकर 18.65 करोड़ से घटकर 3.45 करोड़ रह गई। 

इस लिस्ट में 2012 में बिजनौर के नजीबाबाद के विधायक रहे तसलीम  अहबाद का भी है, जिन्होंने 2017 का चुनाव इसी सीट से सपा की टिकट पर जीता था। साल 2012 से 2017 के बीच इनकी संपत्ति 65 फीसद घटकर 3.26 करोड़ से 1.14 करोड़ पर आ गई।



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