शादियों के सीजन की वजह से गोल्ड की डिमांड बढ़ने वाली है। ये अनुमान रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने लगाया है। जीजेईपीसी के मुताबिक मांग के कारण आने वाले महीनों में देश के सोने के आयात में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

नुकसान क्या है: आयात बढ़ने की वजह से सरकार को विदेशी मुद्रा भंडार ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं। इस वजह से चालू खाता घाटा (कैड) प्रभावित होता है। ये सरकार की उस मुहिम के लिए झटका होगा, जिसके तहत सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत की गई थी। आपको बता दें कि इस स्कीम में फिजिकल गोल्ड की बजाए बॉन्ड के तौर पर गोल्ड में निवेश का मौका दिया जाता है। सरकार इस वर्चुअल गोल्ड पर ब्याज भी देती है। 

कितना है आयात:  अप्रैल-सितंबर 2021 के दौरान गोल्ड का आयात लगभग 24 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जीजेईपीसी ने कहा कि पिछले छह महीनों के दौरान आयात में उतार-चढ़ाव की प्रवृत्ति देखी गई है और यह कोविड के पहले के वर्षों के आंकड़ों के बराबर आ गया है।

जीजेईपीसी ने कहा कि मई (12.98 टन) और जून (17.57 टन)-2021 में सोने का आयात दूसरी विनाशकारी कोविड लहर से बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिसके चलते राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लग गया। इससे रत्न और आभूषण सहित कई उद्योग प्रभावित हुए। जीजेईपीसी ने कहा कि आयात अगस्त में बढ़ा। माह के दौरान आयात का आंकड़ा 118.08 टन रहा। यह सोने के आयात का दूसरा सबसे ऊंचा आंकड़ा है।

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क्या है बढ़ोतरी की वजह: जीजेईपीसी के चेयरमैन कोलिन शाह ने कहा कि जुलाई, अगस्त और सितंबर 2021 के दौरान आयात में वृद्धि लॉकडाउन के हटने, घरेलू और निर्यात मांग में सुधार और त्योहारी सीजन की शुरुआत के कारण हुई है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादों की मांग में तेज वृद्धि हुई है।



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