राजस्थान से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल पर हमले के मामले में राजस्थान के तीन बड़े नौकरशाह को फटकार लगी है। मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव, एडीजी इंटेलिजेंस उमेश मिश्रा और सीएमओ सेक्रेटरी अमित ढाका समेत अन्य अफसर संसद की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए। समिति ने इन अधिकारियों को संसद के गलियारे में आधे घंटे कमरे के बाहर बैठाए रखा।

नागौर के सांसद बेनीवाल के काफिले पर पिछले साल 12 नवंबर को हमला हुआ था, जिसकी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। बेनीवाल इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास ले गए। इसकी सुनवाई के लिए ही अधिकारी दूसरी बार तलब किए गए थे।

रिपोर्ट दर्ज नहीं करने को लेकर समिति ने कड़ी फटकार लगाई। डीजीपी ने गलती मानते हुए आश्वासन दिया कि एक सप्ताह में हमले की नामजद एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी। विशेषाधिकार हनन के इस मामले में पूर्व मुख्य सचिव डी बी गुप्ता भी कार्रवाई के दायरे में हैं।

12 नवंबर 2019 को बायतु में सांसद हनुमान बेनीवाल के काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं करने पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने विशेषधिकार हनन का प्रस्ताव शीतकालीन सत्र में पेश किया था। सांसद के प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर के विशेषधिकार हनन समिति को भेज दिया था। जिस पर कमेटी ने अधिकारियों को तलब किया था। मामले में पिछली बार 17 मार्च को अधिकारी विशेषाधिकार हनन समिति के सामने पेश हुए थे, जिसमें सिर्फ मुख्य सचिव का पक्ष सुना गया था। बाकी अधिकारियों को अगली बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए थे।





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