नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड के नेतृत्व वाले पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के बीच मंगलवार (21 जुलाई) की बहुप्रतीक्षित बैठक मतभेदों को दूर करने में नाकाम रही। दरअसल, प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में हुई बैठक में राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई।
पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य एवं एनसीपी के वरिष्ठ नेता गणेश शाह ने बताया कि राजधानी काठमांडू के बालूवतार में प्रधानमंत्री के आवास पर समिति की बैठक हुई, लेकिन इसमें राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 45 सदस्यीय स्थायी समिति की बैठक में प्रधानमंत्री ओली शामिल नहीं हुए। पार्टी की शीर्ष इकाई की अगली बैठक एक सप्ताह बाद होगी।
नेपाल में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की मंगलवार (21 जुलाई) को हुई बहुप्रतीक्षित बैठक में प्रधानमंत्री ओली शामिल नहीं हुए। ओली और पुष्प कमल दहल प्रचंड के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। ओली और प्रचंड को अपने मतभेदों को दूर करने के लिए पार्टी की स्थायी समिति की अहम बैठक सात बार टाली जा चुकी थी।
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स्थायी समिति के सदस्य एवं एनसीपी के वरिष्ठ नेता गणेश शाह ने बताया कि ओली बैठक में शामिल नहीं हुए। मंगलवार को भी बैठक दो घंटे के लिए स्थगित की गई, क्योंकि दोनों नेताओं ने अहम मुद्दों के हल के लिए अनौपचारिक चर्चा करने के लिए कुछ वक्त मांगा। बैठक काठमांडू के बालूवतार में प्रधानमंत्री के आवास पर दोपहर करीब एक बजकर 20 मिनट पर शुरू हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेता देव गुरूंग ने मीडिया से कहा कि बैठक प्रधानमंत्री ओली की सहमति से शुरू हई थी, लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हुए।
कुछ नेता पर आरोप भी लगाए
पार्टी की 45 सदस्यीय शक्तिशाली स्थायी समिति की बैठक सबसे पहले 24 जून को बुलाई गई थी। इससे पहले ओली ने आरोप लगाया था कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा, तीन भारतीय क्षेत्रों को देश के नए राजनीतिक नक्शे में शामिल करने के बाद उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए पार्टी के कुछ नेता पड़ोसी देश के साथ मिल गए हैं। प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे लोग इस्तीफा मांग रहे हैं, न कि भारत मांग रहा है। उन्होंने ओली को अपने आरोप के समर्थन में सुबूत दिखाने को भी कहा।
भारत विरोधी टिप्पणी पर इस्तीफा मांगा
पूर्व प्रधानमंत्री ‘प्रचंड’ समेत एनसीपी के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि ओली की हालिया भारत विरोधी टिप्पणी न तो राजनीतिक रूप से सही थी और न ही कूटनीतिक रूप से उपयुक्त थी। प्रचंड ने सोमवार (20 जुलाई) को कहा था कि पार्टी के अंदर मतभेदों को दूर करने की कोशिशें जारी हैं।







