नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज इस बात पर असंतोष जताया कि उसके स्पष्ट आदेश के बावजूद कई राज्य अनाथ बच्चों के बारे में जानकारी नहीं जुटा पाए हैं. कोर्ट ने आज खास तौर पर पश्चिम बंगाल को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि पश्चिम बंगाल मार्च 2020 से अब तक सिर्फ 27 बच्चों के अनाथ होने की बात कह रहा है. जबकि सभी राज्यों ने जो संख्या बताई है, उसका योग 6855 है.

जस्टिस एल नागेश्वर राव और अनिरुद्ध बोस की बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पश्चिम बंगाल सरकार अनाथ बच्चों की संख्या का पता नहीं लगा पा रही है, तो उसे किसी दूसरी एजेंसी को यह ज़िम्मा देना पड़ेगा. जजों ने इस बात पर भी निराशा जताई कि उन्होंने मार्च 2020 से अब तक अनाथ हुए बच्चों की संख्या पूछी थी. लेकिन कई राज्यों ने समझा कि उन्हें सिर्फ उन बच्चों का पता लगाना है, जो कोरोना के चलते अनाथ हुए. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल समेत सभी राज्यों को एक और मौका देते हुए मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को करने की बात कही.

आज केंद्र सरकार ने बताया कि कोरोना के चलते अनाथ हुए बच्चों के बड़े होने पर उन्हें उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपए दिए जाएंगे. यह राशि पीएम केयर्स फंड से दी जाएगी. इस पर कोर्ट ने कहा कि क्या यह सहायता पिछले मार्च से अब तक अनाथ हुए सभी बच्चों को नहीं दी जा सकती? हालांकि, जजों ने बाद में यह स्पष्ट किया कि वह पीएम केयर्स फंड से दी जा रही मदद के विस्तार के लिए नहीं कह रहे हैं. लेकिन उनकी चिंता दूसरे अनाथ बच्चों को लेकर भी है. केंद्र और राज्यों को अपने पास उपलब्ध योजनाओं के तहत उनकी भी मदद करनी चाहिए.

कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि वह अनाथ बच्चों की जानकारी जुटाने के लिए चाइल्ड केयर हेल्पलाइन, पुलिस, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं समेत हर विभाग की मदद लें. जो बच्चे ज़िला चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के सामने रजिस्टर्ड हुए हैं, उनकी ज़रूरतों का ध्यान रखा जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि उनकी शिक्षा बिना किसी बाधा के चले. जहां तक संभव हो, उन्हें उसी स्कूल में पढ़ने दिया जाए जहां वह पहले से पढ़ रहे हैं.

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