दशहरा, करवा चौथ, दिवाली, छठ जैसे आने वाले त्योहरों को लेकर कारोबारी उत्साहित हैं। वहीं, सर्राफा बाजारों में भी इसबार रौनक की उम्मीद है, क्यों सोना-चांदी के भाव में काफी गिरावट आ चुकी है। पिछले साल कोरोना संकट की वजह से सोने की बिक्री में गिरावट आई थी, लेकिन इस साल देश में टीकाकरण बढ़ने, कोरोना का प्रसार घटने और सोने की कीमतें कम होने से आभूषण विक्रेताओं को त्योहारों पर बिक्री में तेज इजाफा होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि इससे बहुत हद तक भरपाई होने की आस है। बता दें अपने उच्चतम रेट से सोना करीब 9500 रुपये सस्ता है। 

कोरोना ने बिगाड़ा था पिछले साल खेल

सोने की खरीदारी को लेकर भारतीय उपभोक्ताओं में परंपरागत आकर्षण रहा है। शादी-विवाह से लेकर त्योहारों में वह सोना खरीदना पसंद करते हैं, लेकिन पिछले साल कोरोना संकट की वजह से देश में ज्यादातर समय आभूषण की दुकानें बंद रहीं। पिछले साल त्योहारी सीजन में जो लोगों ने ने सोने की खरीदारी की लेकिन उन्होंने गोल्ड ईटीएफ, ई-गोल्ड और गोल्ड बांड जैसे डिजिटल गोल्ड को तरजीह दी। इससे आभूषण विक्रेताओं को निर्माताओं को तगड़ा झटका लगा। लेकिन कोरोना के मामले घटने से इस बार त्योहारी सीजन में आभूषण विक्रेताओं को पिछले साल की भरपाई होने हो जाने की उम्मीद है।

इस वजह से भी बढ़ी है उम्मीद

अंतिम तिमाही त्योहारों की होती है। इसमें, भारतीय आमतौर पर शादी के समारोहों के लिए सोने के आभूषणों की खरीद को बढ़ावा देते हैं, जबकि दिवाली या रोशनी के त्योहार के साथ समाप्त होने वाले समारोहों की एक शृंखला के दौरान निवेश के लिए सिक्कों और बार की बिक्री में वृद्धि होती है, जो इस साल नवंबर में पड़ रहे हैं। ऐसे में आभूषण विक्रेताओं को त्योहारों का मौसम चहल-पहल भरा रहने की उम्मीद है। साथ ही महामारी से राहत का मतलब है कि वब अपनी सबसे आकर्षक बिक्री अवधि में रिकवरी कर सकते हैं।

सस्ता सोना बढ़ा सकता है आकर्षण

पिछले साल महामारी की मार और कीमतें 55 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने से त्योहारों के साथ कुल बिक्री में भारी गिरावट आई थी। अब कोरोना टीकाकरण दरों में वृद्धि और कोरोना के मामले घटने से बेहतर बिक्री को लेकर आशावाद बढ़ा है। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन आशीष पेठे के अनुसार, मांग में कमी और कम कीमतों से पिछली तिमाही में सोने की बिक्री दो साल पहले की समान अवधि की तुलना में 15 फीसदी अधिक हो सकती है।

अमेरिका-यूरोप के बराबर ज्वेलरी की खपत

भारत के सोने की खपत का लगभग 70 से 80 फीसदी हिस्सा गहनों के रूप में है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीयों ने 2020 में 315.9 टन सोने के गहने खरीदे, जो अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में संयुक्त खरीद के लगभग बराबर है। चीन 433.3 टन के साथ सोने का सबसे बड़ा खरीदार है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीयों ने 2019 के अक्टूबर-दिसंबर त्योहार की अवधि में 194.3 टन और पिछले साल की समान अवधि के दौरान 186.2 टन सोना खरीदा।

दो दशक के निचले स्तर पर बिक्री

भारत में पिछले साल के त्योहारी सीजन के दौरान ही सिर्फ सोने की खरीद में गिरावट नहीं आई थी। मेटल्स फोकस लिमिटेड के सलाहकार चिराग शेठ के अनुसार, 2020 में खरीद दो दशक के निचले स्तर 446.4 टन पर पहुंच गई थी। उनका कहना है कि ऐसे में बिक्री 2021 में 50 फीसदी तक बढ़ सकती है। सेठ का यह भी कहना है कि विशेष रूप से ऊर्जा संकट जो उच्च मुद्रास्फीति को जन्म दे सकता है और वैश्विक विकास को प्रभावित कर सकता है वह परेशानी खड़ी कर सकता है।



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