निवेश की सुरक्षा के साथ उसपर मिलने वाला रिटर्न किसी भी निवेशक के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस पैमाने पर सोना सावधि जमा (एफडी) और शेयर सहित सभी निवेश विकल्पों से ज्यादा आगे है। पिछले एक साल में सोने ने करीब 40 फीसदी रिटर्न दिया है जो इसी अवधि में एफडी पर मिले ब्याज से करीब आठ गुना अधिक है। इस अवधि में शेयरों ने आधा फीसदी से भी कम रिटर्न दिया है। जबकि लिक्विड फंड ने इस अवधि में शेयरों से करीब 15 गुना अधिक रिटर्न दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रिटर्न देखकर किसी एक विकल्प में निवेश करना समझदारी नहीं है। आपके पोर्टफोलियों में एफडी, सोना, शेयर और म्यूचुअल फंड का सही अनुपात होना चाहिए।
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कितना रिटर्न: पिछले एक साल में सोना एफडी और इक्विटी की तुलना में करीब आठ गुना रिटर्न दिया है।
| अवधि | सेंसेक्स | लिक्विड फंड | सोना | एफडी |
| एक हफ्ते | -1.37 | 0.06 | 3.75 | 2.90 |
| एक वर्ष | 0.34 | 4.93 | 39.58 | 5.10 |
| तीन वर्ष | 4.90 | 6.24 | 15.88 | 5.30 |
| पांच वर्ष | 5.99 | 6.63 | 12.49 | 5.40 |
सोने में निवेश के कई विकल्प
गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ईटीएफ और ई-गोल्ड सोने में निवेश के बेहतर विकल्प हैं। गोल्ड बॉन्ड में सरकार की गारंटी है और इसमें 2.50 फीसदी ब्याज भी मिलता है जो सोने के किसी अन्य विकल्प में नहीं है। इसके अलावा गोल्ड बॉन्ड में ऑनलाइन निवेश पर 50 रुपये की छूट भी मिलती है। इसकी परिपक्वता अवधि आठ साल है। लेकिन जरूरत पर पांच साल बाद भी निकाल सकते हैं। साथ ही इसे शेयर बाजार में कभी भी बेच सकते हैं। हालांकि, ऐसा करने पर टैक्स चुकाना पड़ेगा। गोल्ड ईटीएफ भी म्यूचुअल फंड स्कीम है। इसे भी शेयरों की तरह-खरीद बेच सकते हैं।
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लिक्विड फंड में क्या है खास
इसे मनी मार्केट फंड भी कहा जाता है। कम अवधि के लिए पैसा लगाने की सुविधा की वजह से मनी मार्केट फंड को छोटी अवधि के बेहतरीन निवेश विकल्प के तौर पर जाना जाता है। लिक्विड फंड के रिटर्न में ब्याज दरों के अनुसार उतार-चढ़ाव आता रहता है। इस फंड की अधिकांश पूंजी उन तय आय (फिक्स्ड इनकम) वाले माध्यमों में निवेश की जाती है जिनकी परिपक्वता अवधि एक साल से कम होती है। यह उन निवेशकों के लिए बेहतर माना जाता है जो किसी वजह से अपना पैसा बचत खाते में रखने की बजाय कहीं और रखने के साथ ही बेहतर रिटर्न भी चाहते हैं।
शेयरों में आंखमूंदकर निवेश नहीं
पिछले एक साल में शेयरों ने भले ही कम रिटर्न दिया है। लेकिन लंबी अवधि में इसने बेहतर रिटर्न दिया है। 10 साल में औसतन 10 फीसदी रिटर्न शेयरों ने दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शेयरों में निवेश करते समय पांच साल से अधिक का लक्ष्य लेकर चलना चाहिए। साथ ही नए निवेशकों को सीधे शेयरों में लगाने की बजाय इक्विटी फंड के जरिये शुरुआत करनी चाहिए।
कितना करें निवेश
किस निवेश विकल्प में कितना निवेश करें इसे लेकर कोई मानक तय नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका फैसला निवेशकों की आय, उम्र और जिम्मेदारी के को ध्यान में रखकर किया जाता है। उनका कहना है कि सोने में पांच से 15 फीसदी निवेश होना चाहिए। वहीं शेयरों में 10 से 15 फीसदी निवेश होना चाहिए। इसी तरह म्यूचुअल फंड और एफडी में एक तय अनुपात होना चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य और जीवन बीमा भी जरूर होना चाहिए जो आपके और निवेश की सुरक्षा के लिए जरूर होता है।







