सोशल मीडिया पर सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भरमार है। यह सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर (एसएमआई) अब निवेश की भी सलाह देने लगे हैं जिसमें मोटे रिटर्न का दावा किया जा रहा है जिसका कोई आधार नहीं है। सेबी से मान्यताप्राप्त वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के वित्तय गोल अलग-अलग होते हैं। ऐसे में इंफ्लुएंसर के झांसे में आकर पोर्टफोलियो में बदलाव आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

एफडी से बेहतर नहीं कॉरपोरेट बॉन्ड

सोशल मीडिया पर वित्तीय सलाह देने वाले कॉरपोरे बॉन्ड को एफडी से बेहतर बताते हैं। कॉरपोरेट बॉन्ड को एनसीडी भी कहा जाता है। आईआईएफएफल, डीएचएफएल और हाल में फ्यूचर ग्रुप भी उस समूह में शामिल हो गया है जो कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों का मूलधन तो दूर ब्याज भी चुकाने में असफल रहा। बैंक में पांच लाख रुपये तक जमा की गारंटी है लेकिन कॉरपोरेट बॉन्ड की कोई गारंटी नहीं। ऐसे में एफडी कॉरपोरे बॉन्ड से बेहतर कैसे हो सकती है।

एक सुझाव सभी पर लागू नहीं

शेयरों में 40 फीसदी तक निवेश की सलाह सोशल मीडिया पर दी जा रही है। सेबी से मान्यता प्राप्त वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेश का पोर्टफोलियो निवेशक की आय, उम्र, जिम्मेदारी और लक्ष्य पर आधारित होता है। 25 वर्ष की उम्र में शेयरों में निवेश कम जोखिमभरा और ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि लंबी अवधि में शेयरों में बेहतर रिटर्न मिलता है। लेकिन 50 की उम्र में शेयरों में निवेश जोखिमभरा हो सकता है क्योंकि उस समय जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं और जोखिम लेने की क्षमता घट जाती है।

शेयरों में रिटर्न की गारंटी नहीं

शेयर बाजार सबसे जोखिमभरा होता है और एफडी की तरह रिटर्न की गारंटी नहीं होती है। जबकि सोशल मीडिया पर एक साल में 14 से 16 फीसदी रिटर्न की गारंटी देने की बात की जा रही है। जबकि हकीकत यह है कि 10 साल में मिडकैप शेयरों में औसतन 14.44 फीसदी, टेक्नोलॉजी में 1682 फीसदी और इन्फ्रा सेक्टर में 7.60 फीसदी रिटर्न मिला है। इसमें भी श्रेणीवार पड़ताल करें तो रिटर्न का आकलन और भी मुश्किल होगा। ऐसे में शेयरों में मोटे रिटर्न की गारंटी वाली सलाह मिल रही है इसे खतरे का संकेत समझकर सावधान रहने में ही भलाई है।

क्रिप्टोकरेंसी में करा रहे निवेश

सोशल मीडिया पर विशेष बनकर कुछ लोग क्रिप्टोकरेंसी में भी 10 फीसदी निवेश की सलाह दे रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में यह मान्य नहीं है। इतना ही नहीं यह सलाहकार 40 फीसदी शेयरों में, 30 फीसदी सोना या कॉरपोरेट बॉन्ड में, 20 फीसदी वाणिज्यिक रियल एस्टेट में निवेश की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा सिप में निवेश को घाटे का सौदा बताया जा रहा है।

इन पांच बातों का रखें ध्यान

– क्या आपको उस उत्पाद की समझ ही जिसमें निवेश करना चाहते है

– निवेश पर कितना शुल्क लगेगा और टैक्स के बाद कितना रिटर्न मिलेगा

– क्या आपके सभी निवेश महंगाई से लड़ने में सक्षम हैं

– आपको जहां निवेश की सलाह दी जा रही है उसमें जोखिम कितना है

– आप अपने निवेश पर कैसे नजर बनाए रख सकते हैं

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