हाइलाइट्स:

  • दिल्ली दंगों के मामलों की सुनवाई कर रही अदालत ने हाई कोर्ट से स्पष्टीकरण
  • अंतिम जमानतों की अवधि बढ़ाने को लेकर स्थिति साफ करने की मांग
  • दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जमानत मांग रहे दंगों के आरोपी

नई दिल्ली
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों की विशेष तौर पर सुनवाई के लिए गठित एक अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट से उसके अंतरिम जमानतों से जुड़े आदेशों पर सफाई देने का अनुरोध किया है। अदालत ने हाई कोर्ट से पूछा है कि क्या अंतरिम जमानतों की समय-समय पर बढ़ाई जा रही अवधि से जुड़े उसके आदेश दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में भी लागू होंगे या नहीं।

अदालत ने अपने सामने अंतरिम जमानत की मांगों से नजर आ रहे एक खास ट्रेंड पर शक जताते हुए हाई कोर्ट से इस स्पष्टीकरण का निवेदन किया। अदालत ने पाया कि उससे मानवीय आधारों पर अंतरिम जमानतें लेकर आरोपी अगले ही दिन हाई कोर्ट के संबंधित आदेशों को आधार पर उसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

अडिशनल सेशन जज (एएसजे) विनोद यादव ने इस अहम मुद्दे पर जल्द स्पष्टता के लिए अपना आदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भिजवाया है। उन्होंने सुहैब सैफी नाम के एक दंगा आरोपी को अंतरिम जमानत देने से मना करते हुए यह मुद्दा उठाया। आरोपी ने एक महीने की अंतरिम जमानत मांगी थी। इस आधार पर कि उसे 10वीं क्लास की सीबीएसई की दो परीक्षाएं देनी हैं, जिनमें से एक परीक्षा 23 सितंबर को और दूसरी 25 सितंबर को है।

इससे पहले उसने जेल से ही परीक्षाएं दी थीं और वह सोशल साइंस के पेपर में पास भी हो गया। अदालत ने उसे जमानत देने से मना करते हुए कहा कि वह दंगा और हत्या के मामले में आरोपी है और जेल में परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहले से पर्याप्त व्यवस्था है। अदालत ने जेल सुप्रीटेंडेंट को निर्देश दिया कि वह जेल में आवेदक/आरोपी को पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें और सामान मुहैया कराने के साथ परीक्षाओं की तैयारी के लिए व्यवस्था मुहैया करवाएं।

एएसजे यादव ने अपने आदेश में अंतरिम जमानत के लिए आ रही आर्जियों के संबंध में आशंका जाहिर की। उन्होंने कहा, अदालत में एक खास प्रचलन देखने के मिल रहा है कि बड़े सारे आरोपी इस या फिर उस आधार पर अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर रहे हैं। अगर अदालत उन्हें एक हफ्ते या मामले में जरूरत के आधार पर जमानत दे भी देती हैं तो आरोपी इस आधार पर अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग करने लगते हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट की फुल बेंच ने अंतरिम जमानतों की अवधि 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।



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