हाइलाइट्स:

  • हाथरस गैंगरेप और मर्डर की जांच करने बूलगढ़ी गांव पहुंची सीबीआई टीम आज से जांच शुरू कर देगी
  • हाथरस की सीबीआई जांच से योगी सरकार की खोई साख मिलने की उम्मीद लेकिन सामने कई चुनौतियां
  • केस की शुरुआती जांच में स्थानीय पुलिस की तरफ से जांच में देरी हुई, इससे सीबीआई के सामने मुश्किलें

हाथरस
हाथरस गैंगरेप और मर्डर की जांच करने बूलगढ़ी गांव पहुंची सीबीआई टीम आज से जांच शुरू कर देगी। केंद्रीय एजेंसी ने मामले में आईपीसी की धारा 376डी (गैंगरेप), 307 (हत्या का प्रयास) और 302 (हत्या) के साथ ही एससी-एसटी ऐक्ट की धारा 3 के तहत केस दर्ज किया है। बता दें कि केस में एसआईटी जांच के बीच योगी सरकार ने सीबीआई को जांच की अनुशंसा भेजी थी। बीजेपी यह भी मान रही है कि हाथरस केस में योगी सरकार और पुलिस को जो किरकिरी हुई है, सीबीआई की जांच रिपोर्ट खोई साख को वापस दिलाएगी। हालांकि यह इतना भी आसान नहीं है।

दरअसल इस केस में यूपी पुलिस की तरफ से बड़े स्तर पर लापरवाही हुई हैं। सबसे बड़ी लापरवाही इस केस की जांच में हुई देरी है और यही सीबीआई के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हाथरस पीड़िता की घटना के 72 घंटे के अंदर मेडिकल जांच नहीं हुई।

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जांच में हुई देरी सीबीआई के लिए बड़ी चुनौती

घटना के 2 हफ्ते बाद पीड़िता के सैंपल फरेंसिक जांच के लिए भेजे गए थे। माना जा रहा है कि जांच में देरी की वजह से ही फरेंसिक रिपोर्ट में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के शरीर में सीमन नहीं पाया गया था।

युवती के साथ रेप के 11 दिन बाद सैंपल लिए गए थे जबकि सरकारी गाइडलाइन सख्त रूप से कहती है कि घटना के 96 घंटे तक ही फरेंसिक सबूत मिल सकते हैं। ऐसे में मौत से पहले 22 सितंबर को पीड़िता का बयान जिसमें उसने गैंगरेप का आरोप लगाया है, सीबीआई उसे ही सबूत का मुख्य आधार मान सकती है।

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आरोपियों से बिना पूछताछ किए भेजा गया जेल

यहां गौर करने वाली बात यह है कि यूपी पुलिस जिसने मामले में शुरुआती एफआईआर दर्ज की थी उसने कोर्ट से आरोपियों की कस्टडी बिना मांगे ही उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। मुख्य आरोपी संदीप 20 सितंबर को गिरफ्तार हुआ था जबकि बाकी तीन आरोपी 23 से 27 सितंबर के बीच गिरफ्तार हुए थे।

महिला अधिकारी को भी जांच में नहीं किया गया शामिल
साथ ही केस की शुरुआती जांच में कोई महिला पुलिस अधिकारी को भी इनचार्ज नहीं सौंपा गया था जो कि रेप के मामलों में अनिवार्य होता है। इसके पीछे वजह यह है कि यूपी पुलिस शुरू से इसे रेप केस नहीं मान रही थी।

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हाथरस केस में सीबीआई किस प्लान करेगी काम
अब सीबीआई कोर्ट से चारों आरोपियों की कस्टडी की मांग करेगी और उनसे पूछताछ करेगी। सीबीआई आरोपियों के साथ ही पीड़िता के परिवार से भी पूछताछ कर सकती है। सीबीआई पीड़िता की मां से मैजिस्ट्रेट के सामने बयान देने को भी कह सकती है क्योंकि वह मामले की मुख्य गवाह हैं।

जांच को लीड करने वाली अधिकारी कौन हैं?
बता दें कि सीबीआई ने 19 साल की दलित युवती के साथ गैंगरेप की घटना के करीब 4 हफ्ते बाद रविवार को केस दर्ज दिया है। सेंट्रल एजेंसी को इसकी जांच में कई चुनौतियां आ सकती हैं। सीबीआई टीम की प्रमुख सीमा पाहुजा हैं जो सीबीआई की गाजियाबाद यूनिट की डीएसपी स्तर की अधिकारी हैं। वह इससे पहले हिमाचल प्रदेश में नाबालिग बच्ची के साथ रेप जैसे कई चर्चित मामलों को देख चुकी हैं। उनके साथ सेंट्रल फरेंसिक साइंस लैब से एक टीम भी बूलगढ़ी पहुंची हैं।

सीबीआई टीम ने मांगा सबूत और केस डायरी
मामले की जांच के लिए सीबीआई टीम रविवार की शाम को हाथरस पहुंची। हाथरस के एसपी विनीत जायसवाल ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में बताया कि सीबीआई टीम ने जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों और केस डायरी सहित केस से जुड़े डॉक्युमेंट्स मांगे। वहीं एक सीनियर पुलिसकर्मी ने बताया कि जांच के लिए सीबीआई के 15 अधिकारियों के अगले कुछ हफ्ते हाथरस में रहने की संभावना है।

29 सितंबर को हुई थी पीड़िता की मौत
बता दें कि 14 सितंबर को हाथरस जिले के चंदपा क्षेत्र में 19 साल की एक दलित युवती से कथित रूप से गैंगरेप का मामला सामने आया था। युवती को पहले अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था जहां बीते 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई। मौत के बाद रात में ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। इसके बाद घटना के विरोध में देश में जगह-जगह प्रदर्शन हुए। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पीड़िता के परिवार से मिलने हाथरस गया था।

इकनॉमिक टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया के इनपुट के साथ

सीबीआई आज से करेगी जांच



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