हाइलाइट्स:

  • हाथरस घटना में पीड़िता की FSL रिपोर्ट के आधार पर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ने अंतिम नजरिया बताया
  • मेडिकल कॉलेज के फाइनल ओपिनियन के अनुसार, वैजाइनल या ऐनल इंटरकोर्स के कोई संकेत नहीं मिले
  • अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने फरेंसिक रिपोर्ट को अप्रासंगिक करार दिया है

अलीगढ़
हाथरस घटना में पीड़िता की फरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ने अपना अंतिम नजरिया बताया। मेडिकल कॉलेज के फाइनल ओपिनियन के अनुसार, वैजाइनल या ऐनल इंटरकोर्स के कोई संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि इसमें शारीरिक चोट (गर्दन और पीठ) का जिक्र किया गया है।

यह रिपोर्ट चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि 10 दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज की तरफ से तैयार की गई पीड़िता की मेडिको लीगल रिपोर्ट में ताकत के इस्तेमाल और वैजाइना में पीनिट्रिशन के संकेत मिलने की बात कही गई थी। अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवसिर्टी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने फरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) रिपोर्ट को अप्रासंगिक करार दिया है।

फरेंसिक सैंपल कलेक्शन में क्या कहती है केंद्र की गाइडलाइन
अंग्रेजी समाचारपत्र इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के सीएमओ डॉ. अजीम मलिक ने हाथरस केस की पीड़िता की फरेंसिक लैब रिपोर्ट को बेकार करार दिया। डॉ. अजीम मलिक का कहना है, ‘युवती के साथ रेप के 11 दिन बाद सैंपल लिए गए थे जबकि सरकारी गाइडलाइन सख्त रूप से कहती है कि घटना के 96 घंटे तक ही फरेंसिक सबूत मिल सकते हैं। ऐसे में यह रिपोर्ट घटना में रेप की पुष्टि नहीं कर सकती।’

बता दें कि 14 सितंबर को हुई घटना की प्राथमिक एफआईआर में मारपीट और जान से मारने का जिक्र किया गया था। 22 सितंबर को पीड़िता ने होश में आने के बाद गैंगरेप की बात बताई। इसके बाद पीड़िता के सैंपल लेकर आगरा की फरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजे गए थे।

फरेंसिक रिपोर्ट में नहीं मिला था सीमन
बता दें कि एफएसएल रिपोर्ट में कहा गया था कि पीड़िता के शरीर में सीमन नहीं मिला। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए एडीजी (लॉ ऐंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने हाथरस मामले में कहा था कि 19 साल की दलित युवती का रेप नहीं हुआ था और उसने अत्यधिक पिटाई के कारण दम तोड़ दिया था। आपको बता दें कि सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी पीड़िता की अटॉप्सी रिपोर्ट में साफ था कि पीड़िता का हाइमन और ऐनल ओरिफिस (गुदा छिद्र) क्षतिग्रस्त होने के बाद घाव ठीक होना पाया गया है।

पीड़िता की रिपोर्ट में अलग-अलग दावे से केस की स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानिए, पीड़िता की MedicoLegal, Atopsy, FSL और अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज की फाइनल रिपोर्ट क्या कहती है-

मेडिकोलीगल रिपोर्ट

19 साल की दलित युवती की मेडिको लीगल इंवेस्टिगेशन (MLC) में ‘ताकत के इस्तेमाल’ और ‘वैजाइना में पिनिट्रेशन’ के स्पष्ट संकेत हैं। यह रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज के फरेंसिक एक्सपर्ट्स ने पीड़िता के बयान के बाद लोकल एग्जामिनेशन के आधार पर 22 सितंबर को तैयार की थी। रिपोर्ट में ओपिनियन कॉलम में डॉक्टर ने लिखा है, ‘मेरा नजरिया है कि ताकत के इस्तेमाल के संकेत हैं। हालांकि, पिनिट्रेशन और इंटरकोर्स के संबंध में नजरिया FSL रिपोर्ट की लंबित उपलब्धता के अधीन है।’ अस्पताल ने वैजाइना में पिनिट्रेशन मामले में अपना नजरिया सुरक्षित रखा था और मामले को जांच के लिए सरकारी फरेंसिक लैब भेज दिया था।

रिपोर्ट के पेज नंबर 23 पर सेक्सुअल असॉल्ट फरेंसिक एग्जामिनेशन के तहत डीटेल ऑफ ऐक्ट में लिखा गया है कि वैजाइना में पिनिट्रेशन हुआ था लेकिन बावजूद इसके सीमन नहीं मिला। मेडिकल एग्जामिनेशन करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि पीड़िता घटना के वक्त बेहोश थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घटना के दौरान या बाद में दर्द भी हुआ था।

पीड़िता की अटॉप्सी रिपोर्ट
29 सितंबर को पीड़िता की मौत के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ने उसकी अटॉप्सी रिपोर्ट तैयार की थी। अटॉप्सी रिपोर्ट में लिखा गया-
पीड़िता का हाइमन मल्टिपल हील्ड टियर हैं- यानी हाइमन के क्षतिग्रस्त होने के बाद ठीक होना। साथ ही ऐनल ओरिफिस (गुदा छिद्र) क्षतिग्रस्त होने के बाद घाव ठीक होना पाया गया है।

पीड़िता की एफएसएल रिपोर्ट
पीड़िता की FSL रिपोर्ट में बताया गया है कि नमूनों में स्पर्म नहीं थे। फरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के नमूने 22 सितंबर को अलीगढ़ के एक अस्पताल में एकत्र किए गए थे और तीन दिन बाद 25 सितंबर को आगरा की फॉरेंसिक लैब में भेजे गए थे।

अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज का फाइनल नजरिया
सादाबाद पुलिस स्टेशन के सीओ को लिखे गए पत्र में अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ने अपना फाइनल नजरिया बताया। मेडिकल कॉलेज के फरेंसिक मेडिसिन विभाग की ओर से जारी फाइनल रिपोर्ट में कहा गया है, ‘फरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर फाइनल ओपिनियन इस प्रकार है-
-किसी भी तरह का वैजाइनल या ऐनल इंटरकोर्स के कोई संकेत नहीं है।
-फिजिकल असॉल्ट के सबूत हैं (गर्दन और पीठ पर चोट है)’



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