हाइलाइट्स:
- हाथरस गैंगरेप पीड़िता का चचेरा भाई मुंबई में रहता है
- भाई ने बताया कि जल्द ही बहन की शादी होनी थी
- कोरोना संकट के चलते शादी टाल दी गई थी
- शादी हो जाती तो शायद ये सब न देखना पड़ता
हाथरस पीड़िता की इसी साल शादी होने वाली थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते शादी रुक गई। अगर शादी हो गई होती, तो शायद यह घटना नहीं होती। पीड़िता के चचेरे भाई ने यह बात कही है। उनका भाई मुंबई उल्हासनगर में रहता है और ड्राइवर है।
चचेरा भाई उल्हासनगर के धोबीघाट इलाके में रहता है। उन्होंने बताया कि पीड़िता तीन बहनें थीं। इनमें से एक लड़की की शादी हो चुकी है। दूसरी बेटी अविवाहित है। पीड़िता सबसे छोटी बेटी थी। उसकी भी सगाई हो चुकी थी। कोरोना के कारण उसकी शादी आगे बढ़ गई थी। अगर शादी हो जाती, तो शायद ऐसा नहीं होता।
टीवी पर देखी खबर
वह बताते हैं कि बहन खेतों में काम करती थी। माता-पिता का हाथ बंटाती थी। घटना के बारे में उन्होंने 6 दिन बाद टीवी पर खबर देखी, तो चौंक गए। बहन ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी। पहले भी उसके साथ बलात्कार की कोशिश की गई थी।
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‘जातिवाद चरम पर’
वह बताते हैं कि गांव में वाल्मीकि समुदाय के केवल तीन घर हैं। गांव में जातिवाद चरम है। जातिवाद ने ही बहन की जान ली है। वह बताते हैं कि बलात्कार कर बेरहमी से पिटाई की। पहली बार जब रेप की कोशिश की गई थी, तब चाची की आवाज सुनकर आरोपी भाग गए थे। टिकट न मिल पाने की वजह से वह गांव नहीं जा पा रहे हैं।
सांकेतिक तस्वीर







