सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्क अनिवार्य करते ही इसको लेकर ज्वेलरों ने तेजी दिखाना शुरू कर दिया है। मौजूदा समय में रोजाना चार लाख से अधिक ज्वेलरी की हॉलमार्किंग हो रही है। इस साल जून में हॉलमॉकिंग अनिवार्य होने के बाद अब तक 1.17 करोड़ ज्वेलरी की हॉलमार्किंग हो चुकी है। इसमें जुलाई के बाद जोरदार तेजी आई है। हॉलमार्किंग को ज्वेलर कितनी गंभीरता से ले रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हॉलमार्किंग के लिए भेजी जाने वाली ज्वेलरी की संख्या तीन गुना बढ़ी है।

देशभर के सर्राफा संघ आज हड़ताल पर

देश के 350 सर्राफा संघों ने हॉलमार्किंग के विरोध में 23 अगस्त को हड़ताल आह्वान किया है। इनका कहना है मांग के हिसाब से देश में हॉलमार्किंग केन्द्र नहीं स्थापित किए हैं। इसकी वजह से हॉलमार्किंग केन्द्रों पर कई दिनों तक प्रतिक्षा करनी पड़ती है। इससे कारोबार पर असर पड़ रहा है। जबकि कोरोना संकट की वजह से वह पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

ज्यादा महंगा नहीं है हॉलमार्किंग

 

यदि हॉलमार्क के नाम पर ज्वेलर आपसे अधिक राशि की मांग करे तो सावधान हो जाइए। बीआईएस के मुताबिक हॉलमार्किंग का शुल्क प्रति ज्वेलरी महज 35 रुपये है। देश में पहले हॉलमार्किंग स्वैच्छिक थी यानी ज्वेलर चाहे तो हॉलमार्किंग करा सकते थे। ऐसे में केवल बड़े ज्वेलर की हॉलमार्किंग ज्वेलरी बेचते थे। जबकि बाकी छोटे ज्वेलर बिना हॉलमार्किंग के बेचना ही पसंद करते थे। अब अनिवार्य होने से छोटे ज्वेलर भी हॉलमार्किंग करवा रहे हैं।

हॉलमार्किंग से उपभोक्ताओं को लाभ

gold jewellary

भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस सोने पर हॉलमार्किंग का निर्यंत्रण करता है। शुद्धता के हिसाब से हॉलमार्किंग के मानक बने हुए हैं। हॉलमार्क वाली ज्वेलरी शुद्धता की गारंटी होती है। इसे बेचने पर मेकिंग चार्ज के अलावा अन्य किसी तरह की कटौती नहीं होती है। इसके अलावा गोल्ड लोन लेने की स्थिति में भी बैंक इसे तरजीह देते हैं।

हॉलमार्किंग के पंजीकरण के लिए होड़

बीआईएस के महानिदेशक प्रमोद कुमार तिवारी ने कहा कि हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद ज्वेलरों में इसके लिए पंजीकरण में तेजी देखी जा रही है। एक जुलाई से 20 अगस्त के बीच पंजीकृत ज्वेलरों की संख्या बढ़कर 91 हजार से अधिक हो गई है। यह संख्या जून में हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के पहले के आंकड़े से दोगुनी से भी अधिक है। 16 जून से पहले तक देश में हॉलमार्क पंजीकरण वाले केवल 40 हजार ज्वेलर ही थी।

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एक माह में तीन गुना हुआ पंजीकरण

तिवारी ने बताया है कि हॉलमार्क पंजीकरण के लिए हॉलमार्क केन्द्रों पर ज्वेलरी भेजने वाले ज्वेलरी की संख्या एक माह में करीब तीन गुना बढ़ी है। एक जुलाई से 15 जुलाई के बीज हॉलमार्क केन्द्रों पर ज्वेलरी भेजने वाले ज्वेलरों की संख्या करी 5145 थी। जबकि एक अगस्त से 15 अगस्त के बीच इसकी संख्या बढ़कर 14349 हो गई। इसी तरह एक से 15 जुलाई के बीच हॉलमार्क की गई ज्वेलरी संख्या 14.28 लाख थी जो एक से 15 अगस्त के बीच बढ़कर 42 लाख हो गई।

हॉलमार्किंग से किसे है छूट

सरकार ने 40 लाख रुपये सालाना से कम कारोबार करने वाले ज्वेलरों को हॉलमार्किंग के अनिवार्य नियमों से छूट दे रखी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के ज्वेलरों को राहत मिलेगी जिनके पास संसाधन की भी कमी है। इसके अलावा कुंदन, पोलकी और जड़ाउ ज्वेलरी और पेन को हॉलमार्किंग से छूट दी गई है।

 



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