1377 निर्यातकों ने धोखाधड़ी के जरिए आईजीएसटी रिफंड के लिए 1,875 करोड़ रुपये का दावा किया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक ऐसे निर्यातकों का व्यापार स्थान ट्रेस नहीं किया जा सका है। जोखिम भरे निर्यातकों की इस संख्या में 7 निर्यातक स्टार निर्यातक की श्रेणी में हैं। वहीं ‘स्टार निर्यातकों’ की प्रतिकूल रिपोर्ट भी मिली है। इन 10 ‘स्टार निर्यातकों’ द्वारा दावा किए जाने वाले IGST रिफंड की राशि 28.9 करोड़ रुपये बताई जा रही है। 

 

बता दें  केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 की वार्षिक जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को तीन माह बढ़ाकर सितंबर 2020 तक कर दिया है। उद्योग एवं व्यावसाय के पक्ष में लिए गए एक और निर्णय के तहत केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 24 मार्च को अथवा इससे पहले लिए गए ई-वे बिलों जिनकी वैघता अवधि 20 मार्च से 15 अप्रैल 2020 के बीच होने वाली थी उनकी वैधता अवधि को भी बढ़ा दिया है।

जीएसटी रिटर्न भरने में देरी के लिए अधिकतम फाइन 500 रुपए तय

मासिक और तिमाही बिक्री रिटर्न तथा कर भुगतान फार्म देरी से भरने को लेकर जुलाई 2020 तक अधिकतम विलंब शुल्क 500 रुपये प्रति रिटर्न नियत किया गया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक बयान में कहा, ”जीएसटी करदाताओं को राहत देने के लिए सरकार ने जुलाई 2017 से जुलाई 2020 की अवधि के लिए जीएसटीआर-3बी फार्म भरने को लेकर अधिकतम विलम्ब शुल्क 500 रुपए प्रति रिटर्न पर सीमित कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा तभी उपलब्ध होगी जब इस अवधि की जीएसटीआर-3बी रिटर्न 30 सितंबर 2020 से पहले भर दी जाए।

सीबीआईसी ने अधिसूचित किया है कि अगर कोई कर देनदारी नहीं बनती है तो कोई विलम्ब शुल्क नहीं लेगा। अगर कोई कर देनदारी बनती है, तो अधिकतम विलम्ब शुल्क 500 रुपए प्रति रिटर्न लगेगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि जीएसटीआर-3बी रिटर्न 30 सितंबर 2020 तक दाखिल कर दी जानी चाहिए।





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