PM Modi and Gautam Adani is close so Govt. is not taking any action against Crony capitalism
PM Modi and Gautam Adani is so close to Modi Govt. is not taking any action against Crony capitalism

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Girish Malviye, Freelance Journalist
अडानी के पास इतना धन आया कहा से कि, वह आज दुनिया का दो नंबरी अमीर बन गया ?#
इस प्रश्न पर सीरियस ढंग से आपने कभी सोचा ?
आइए कुछ कमाल के आंकड़ों पर नजर डालते है आपको याद होगा कि 8 नवंबर 2016 को मोदी जी ने आम आदमी की जेब को गहरा झटका देते हुए नोटबंदी की थी….
जब नोटबंदी की गई थी तब 2016 में अडानी की नेट वर्थ थी महज 3.5 अरब डॉलर और आज सितंबर 2022 में अडानी की संपति है 155.2 अरब डॉलर
अडानी की संपति कितने गुना बढ़ी ये मन ही मन में जोड़ लीजिएगा !……
कुछ दिन पहले मित्र Ravindra Patwal ने एक बेहद दिलचस्प आंकड़े पर ध्यान दिलाया उन्होंने बताया कि नोटबंदी वाले साल, 31 मार्च 2016 तक देश में कुल 16 लाख़ 415 करोड़ रुपए नकदी प्रचलन में थी….. ऐसा आरबीआई के ही आंकड़े बता रहे थे और इस साल यानी 2022 की आरबीआई रिपोर्ट यह बता रही हैं कि 31 मार्च 2022 को 31.05 लाख करोड़ रुपए की नकदी सर्कुलेशन में आ गई है
यानि 6 सालो में लगभग दोगुनी मुद्रा आरबीआई ने छाप मारी
आप ही सोचिए कि कहा 31 मार्च 2016 तक आजादी के 70 सालो में कुल 16 लाख़ 415 करोड़ रुपए के नोट छापे गए और वही मात्र पिछले छह सालो में लगभग उतने ही नोट आरबीआई ने छाप दिए और वो सर्कुलेशन में आ भी गए ?
तो इतना धन आखिर गया कहा ?
इस वक्त भारत में यूपीआइ ट्रांजेक्शन 500 अरब महीने में हो रहा है। हम जैसे लोग जो पहले पूरी तनख्वाह को बैंक से कैश ट्रांसफर किया करते थे, अब दस हजार रुपए से अधिक कभी निकालते ही नहीं। एटीएम की संख्या भी कम हुई है
पिछले छह सालो से महंगाई बढ़ रही है और तनख्वाह कम हो रही है देश का जीडीपी ग्रोथ रेट भी घटा है 2015-16 के दौरान जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.01 फ़ीसदी के आसपास थी ओर अब उसकी आधी से भी कम हो गई है 
तो आखिर जो नोट छापे गए वो किसके पास जमा हो रहे है ? क्योंकि वो हमारे आपके पास तो पुहंचे ही नही !……
आज भारत का ग्रास डोमेस्टिक प्रोडक्ट की वैल्यू 3.2 ट्रिलियन डॉलर है और अकेले अडानी की संपत्ति इसके पांच फीसदी तक पहुंच गई है 
Fortune 500 की लिस्ट में मौजूद दुनिया की टॉप कंपनियों में अडानी के पोर्टफोलियो की एक भी कंपनी नहीं है तब भी इतनी तेजी से उसकी दौलत बढ़ी है ?आखिर कैसे ?
यहां तो एक ही संभावना बनती दिख रही है कि अडानी के हाथ कोई नोट छापने की कंपनी लग गई है !
क्या कहते हो मितरो ?…..
यह लेख स्वतंत्र पत्रकार का है ये उनके अपने विचार हैं इससे वेबसाइट का सहमत व जिम्मेदार होना जरूरी नहीं है।

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