चुनाव विश्लेषण संस्था एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) की रिपोर्ट के अनुसार, देश में पंजीकृत गैर मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों की संख्या 2010 के मुकाबले 2019 में दोगुनी हो गई। उन राजनीतिक दलों को गैर मान्यताप्राप्त दल माना जाता है, जिनका पंजीकरण या तो बिलकुल हाल में हुआ हो या जिनको राज्य स्तर की पार्टी बनने के लिए विधानसभा या आम चुनाव में पर्याप्त प्रतिशत में वोट न मिले हों या फिर जिन्होंने पंजीकरण के बाद से कभी चुनाव नहीं लड़ा हो। वर्ष 2010 में ऐसे राजनीतिक दलों की संख्या 1,112 थी, जो 2019 तक बढ़कर 2,301 हो गई।
यूपी की अपना देश पार्टी को सबसे अधिक चंदा
साल 2018 और 2019 के बीच इस संख्या में 9.8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि 2013 और 2014 के बीच इसमें 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट में जिन पंजीकृत गैर मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों का विश्लेषण किया गया, उन्होंने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 65.45 करोड़ रुपये मूल्य के 6,860 चंदे मिलने की घोषणा की, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 24.6 करोड़ रुपये मूल्य के 6,138 चंदे मिलने की घोषणा की। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की अपना देश पार्टी ने उक्त दोनों वित्त वर्षों में सर्वाधिक चंदा राशि 65.63 करोड़ रुपये (4,300 चंदों से) मिलने की घोषणा की, जो वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 में गैर मान्यताप्राप्त दलों द्वारा घोषित चंदा राशि का 72.88 प्रतिशत है।
12.65 प्रतिशत दल दिल्ली से
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्लेषण से संबंधित 138 ऐसे दलों में से 50 प्रतिशत से अधिक की चंदा रिपोर्ट उक्त दोनों में से किसी वित्त वर्ष के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मार्च 2019 तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,301 पंजीकृत गैर मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों में से 653 या 28.38 प्रतिशत दल उत्तर प्रदेश से हैं। इसके बाद इस तरह के 291 या 12.65 प्रतिशत दल दिल्ली से तथा 184 या आठ प्रतिशत दल तमिलनाडु से हैं।







