राजधानी दिल्ली में शनिवार देर रात से लेकर रविवार सुबह तक हुई मूसलाधार बारिश ने तमाम सिविक एजेंसियों की पोल खोल कर रख दी। कई जगहों पर जलभराव के कारण यह बारिश लोगों के लिए आफत साबित हुई। मिंटो रोड पर तो हुए जलभराव के चलते 56 साल के एक आटो चालक की डूबने से मौत हो गई, जबकि यहां एक डीटीसी बस के चालक, कंडक्टर और एक ऑटो-रिक्शा चालक सहित जखीरा अंडरपास पर जलभराव में फंसे कुल 9 लोगों को दिल्ली फायर सर्विस की टीम ने सीढ़ी का इस्तेमाल कर काफी मशक्कत के बाद इन्हें बचाया।
मिंटो ब्रिज पर पिछले 30 सालों से बारिश का पानी भर रहा है, लेकिन आज तक कोई सरकार या स्थानीय निकाय इसका स्थायी हल नहीं निकाल पाई। मिंटो ब्रिज की देखरेख, अंडरपास में जलभराव और साज-सज्जा को मिलाकर चार विभागों के पास इसका जिम्मा है। लगभग 300 मीटर लंबे इस अंडरपास की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, उत्तरी दिल्ली नगर निगम और उत्तर रेलवे की है। सभी विभागों के काम अलग-अलग बंटे हुए हैं।
हर साल पानी भरने की समस्या
मिंटो ब्रिज की जिम्मेदारी चार विभागों पर होने के बावजूद लगभग हर साल यहां पानी भरने की समस्या आती है। वर्ष 2019 में कम बारिश और लोक निर्माण विभाग की सतर्कता के चलते यहां जलभराव नहीं हुआ था, लेकिन इस वर्ष यहां पानी भरने के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई है।
इन चार विभागों के पास जिम्मेदारी
1. उत्तरी दिल्ली नगर निगम : अंडरपास के एक हिस्से की साफ-सफाई का काम उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधीन है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मुख्यालय सिविक सेंटर की ओर से आने वाली सड़क की जिम्मेदारी निगम की है।
2. लोक निर्माण विभाग : पीडब्ल्यूडी के पास अंडरपास के ड्रेनेज और रखरखाव की जिम्मेदारी है।
3. नई दिल्ली नगर पालिका परिषद : कनॉट प्लेस की ओर से आने वाली सड़क की जिम्मेदारी एनडीएमसी की है। एनडीएमसी को यहां साफ-सफाई और साज सज्जा का जिम्मा सौंपा गया है।
4. उत्तर रेलवे : मिंटो ब्रिज के उपरी हिस्से के रखरखाव की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे की है। रेलवे ट्रैक और बाउंडरी वॉल बनाने और उसकी देखरेख का जिम्मा रेलवे के पास है।
मिंटो ब्रिज का इतिहास
मिंटो ब्रिज का निर्माण ट्रेनों के गुजरने के लिए किया गया है। कनॉट प्लेस को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से जोड़ने वाला यह रेलवे ब्रिज का रखरखाव रेलवे और उत्तरी दिल्ली नगर निगम मिलकर करते हैं। इस ब्रिज का नाम भारत में ब्रिटिश सरकार के गवर्नर जनरल और वायसराय लॉर्ड मिंटो के नाम पर पड़ा जिनका कार्यकाल 1905 से 1910 तक रहा था। उनके कार्यकाल में ही मिंटो ब्रिज का निर्माण हुआ था।







