प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। पीएम के इस ऐलान के बाद कई राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को सत्य और न्याय की जीत करार दिया है। सोनिया गांधी ने कहा, ‘आज 700 से अधिक किसान परिवारों, जिनके सदस्यों ने न्याय के लिए इस संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति दी, का बलिदान रंग लाया है। आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है।’

सोनिया गांधी ने आगे कहा कि ”प्रजातंत्र में कोई भी फैसला प्रत्येक शेयर होल्डर और विपक्ष से चर्चा के बाद ही लेना चाहिए। मुझे आशा है कि मोदी सरकार इससे भविष्य के लिए जरुरी कुछ सीखेगी।’

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद शुक्रवार को कहा कि देश के अन्नदाताओं ने सत्याग्रह से अहंकार का सिर झुका दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, ”देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सिर झुका दिया। अन्याय के खिलाफ़ ये जीत मुबारक हो! जय हिंद, जय हिंद का किसान!”

राहुल गांधी ने कृषि कानूनों के खिलाफ कुछ महीने पहले पंजाब में निकाली गई अपनी एक यात्रा के दौरान दिए गए अपने उस बयान एक वीडियो भी साझा किया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि केंद्र सरकार एक दिन ये कानून वापस लेने को मजबूर होगी।
      
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले करीब एक वर्ष से अधिक समय से विवादों में घिरे तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा की और कहा कि इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा। तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन कर रहे थे। 

इधर केंद्र के फैसले को ”भारतीय जनता पार्टी के अहंकार की हार” बताते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में अशुभ नतीजों को भांपते हुए भाजपा सरकार ने ”अपमान का घूंट पी लिया।”

कांग्रेस की कार्यकारी समिति के सदस्य चौधरी ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने पहले ही कहा था कि केंद्र को तीनों कानूनों को वापस लेने के लिए विवश होना पड़ेगा और उनकी ”भविष्यवाणी” सच हो गयी है।
    
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”यह निश्चित ही किसानों के लिए ऐतिहासिक जीत है। आजादी के बाद से देश ने किसानों का कभी इतना बड़ा प्रदर्शन नहीं देखा। भाजपा ने शुरुआत में सोचा कि यह प्रदर्शन शांत हो जाएगा, जैसा कि वह मानती है कि देश में केवल वही अनुशासित राजनीतिक ताकत है। भाजपा और हमारे प्रधानमंत्री ने किसानों की लड़ाई की भावना को गलत समझा। यह भाजपा के अहंकार की हार है।”

एनसीपी मुखिया शरद पवार ने कृषि कानूनों का निरस्त किये जाने को देश के कुछ राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा, ‘जैसे-जैसे यूपी, पंजाब के चुनाव नजदीक आए और हरियाणा, पंजाब में लोगों ने बीजेपी का बहिष्कार करना शुरू कर दिया, उन्होंने #FarmLaws को निरस्त करने का यह फैसला लिया। हम यह नहीं भूल सकते कि इस सरकार के कारण किसान 1 साल तक धरने पर बैठने को मजबूर हुए।’



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