Karnatak & maha govt. have passed a proposal for state border issue.
Karnatak & maha govt. have passed a proposal for state border issue. Both are not following direcion s from Amit Shah

#Maha Govt.#CM Eknath Shinde# Min.Abdul Sattar#Land Deal Scam#Nagpur Devlopment Trust#Karnatak Govt.# Maha Gov.# Border diputes between Maha&Karnatak#Amit Shah#

पिछले आठ साल से देश में मोदी और शाह का बोलबाला चल रहा है। लगता है कि धीरे धीरे मोदी का जादू और शाह की तिकड़में अब काम नहीं कर रही हैं। उसका कारण यह है कि दिल्ली में एमसीडी से हाथ धोना पड़ा और वहीं हिमाचल में भाजपा की सरकार का पतन हो गया। दिल्ली में भाजपा को आम आदमी पार्टी ने धो दिया और हिमाचल में उनकी धुर विरोधी पार्टी कांग्रेस ने भाजपा को करारी मात दे दी। वैसे मोदी शाह और बीजेपी ने गुजरात, दिल्ली और हिहमाचल में फतेह के लिये एड़ी चोटी का दम लगा दिया। लेकिन दिल्ली और हिमाचल में उनकी दाल नहीं गली। प्रचार के दौरान हर सभा व रैली में यह कहते नहीं थक रहे थे कि इस बार परंपरा बदल देंगे। ये बात और है कि गुजरात में उन्होंने अपनी सत्ता को कायम रखती हुए विपक्ष को खत्म सा कर दिया। हालात यह हैं कि आगामी आम चुनावों में भाजपा और मोदी शाह के जादू और कूटनीति की अग्नि परीक्षा होनी है।

PM Modi and Amit Shah both are concerning for Maha & Karnatak row
PM Modi and Amit Shah both are concerning for Maha & Karnatak row

अब उनके सामने बिहार, महाराष्ट्र, यूपी, मध्यप्रदेश जैसे अहम् प्रदेशों में भाजपा को कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है। एक तरफ कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को मिल रही भारी सफलता है। तो दूसरी ओर बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी भाजपा को पापड़ बेलने पड़ेंगे। कर्नाटक और महाराष्ट्र जहां दोनो ही जगहों पर बीजेपी की सरकारें हैं आपस में भिड़ी हुई हैं। ऐसे में भाजपा की फजीहत होना लगभग तय है।
सीएम और मंत्री ने की सुप्रीम कोर्ट और बाम्बे हाई कोर्ट की अवहेलना
अभी वो दिल्ली और हिमाचल के गम से उबरे भी नहीं थे कि महाराष्ट्र में उनकी सरकार के पतन की शुरुआत हो गयी। सीएम एकनाथ शिंदे और मंत्री अब्दुल सत्तार घोटाले में लिप्त पाये जा रहे हैं। बाम्बे हाई कोर्ट ने सीएम​ शिंदे और सरकार को यह नोटिस दिया है​ कि अदालत में मामला लंबित होने के बाद भी मंत्री रहते हुए नागपुर विकास ट्रस्ट के 18 प्लॉट्स की बिक्री अपने करीबी जानकारों को कौड़ियो के दाम कैसे नाम कर दी। यह सभी प्लॉट्स गरीबों के पुनर्वास के लिये आवंटित की जानी थी। यह मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस तरह सरकार में मंत्री अब्दुल सत्तार पर भी अवैध तरीके से 37 एकड़ सरकारी जमीन, जो पशुओं के चारागाह के लिये थी अपने खास लोगों को काफी कम दामों पर बेच दी। इस पर भी अदालती रोक लगी हुई थी। इस नयी मुसीबत से केन्द्रीय भाजपा नेतृत्व से कैसे निपटे। महाराष्ट्र में शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी सीएम शिंदे और अब्दुल सत्तार का इस्तीफा मांग रहा है। उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस मामले में मुख्यमंत्री और मंत्री को कवर करने की कोशिश कर रहे हैं कह रहे हैं कि मामले को समझा बूझा जा रहा है साफ होने पर दोषियों के खिलाफ ऐक्शन लिया जायेगा। दिलचस्प बात यह है कि ये मुद्दा विपक्ष ने नहीं उठाया है बल्कि सुप्रीम व बाम्बे हाईकोट ने सरकार के सीएम और मंत्री को कठघरे में खड़ा किया है।

क्या है कर्नाटक और महाराष्ट्र का मसला
इधर कुछ समय से कर्नाटक और महाराष्ट्र में सीमा का विवाद सिर उठाने लगा है। जानकार लोग कहते हैं जब भी चुनाव नजदीक आता है तो सरकारें इस मामले को उठाने लगती हैं। ये सीमा विवाद आज का नहीं कई दशकों पुराना है। दोनों ही प्रदेश की सरकारें सीमा विवाद को लेकर आपस में नूरा कुश्ती करती हैं अगले साल 2023 में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हैं। इस वजह से जनता को मूल मुद्दों से भटकाने के लिये कर्नाटक सरकार ने सीमा विवाद को हवा दी है। वैसे भी कर्नाटक सरकार प्रदेश में सही तरीके काम न करने की वजह से विवादित रही है। कभी स्कूल ड्रैस कोड को लेकर तो कभी हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं के उत्पातों की वजह से प्रदेश में कोहराम मचा रहा है। 2018 में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनी थी लेकिन कुछ समय बाद ही बीजेपी ने तोड़ फोड़ कर आपरेशन लोटस चलाया और कांग्रेस और जेडीएस के लगभग दो दर्जन विधायकों को बागी होने पर मजबूर कर दिया। और बीएस येद्दुरप्पा एक बार फिर से कर्नाटक के सीएम बनें लेकिन दो साल में ही उनके कुशासन की वजह से केन्द्रीय नेतृत्व ने उनसे इस्तीफा ले लिया। उसके बाद बसवराव बोम्मई को प्रदेश की कमान मिल गयीं लेकिन वो भी सरकार चलाने में विफल रहे हैं। फिलहाल सीमा विवाद को लेकर कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभाओं में एक प्रस्ताव पारित कर यह तय किया है किसी हालात में एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेंगे। इस मामले को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने बसवराव बोम्मई और एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर यह निर्देश दिया कि कोई भी सीएम इस मामले में कोई विवादित बयान नहीं देगा। लेकिन हालात देख कर लग रहा है कि दोनों ही सरकारों और मुख्यमंत्रियों को अमित शाह की बातों का कोई प्रभाव नहीं है।

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