नई दिल्ली: संकट में फंसी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया लि. (वीआईएल) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऑपरेटरों को एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) का बकाया चुकाने के लिए 10 साल का समय देने के फैसले को एक अच्छा नतीजा बताया है. हालांकि, इसके साथ ही वोडाफोन आइडिया का मानना है कि मोबाइल शुल्कों में बढ़ोतरी जरूरी है, तभी टेलीकॉम कंपनियां टिक सकेंगी और मुनाफे की स्थिति में लौट सकेंगी.

‘न्यूनतम दर की अधिकतम सीमा हो तय’

वोडाफोन आइडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रविंदर टक्कर ने सोमवार को एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पूर्व में कंपनी शुल्क बढ़ाने से नहीं हिचकिचाती थी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नियामक और सरकार को न्यनूतम दर की अधिकतम सीमा तय करने के लिए कदम उठाना चाहिए. वोडाफोन आइडिया के निदेशक मंडल ने पिछले सप्ताह इक्विटी और ऋण के जरिये 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना को मंजूरी दी है. इससे कंपनी को परिचालन में बने रहने में मदद मिलेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राहत

इस राशि से नकदी संकट से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी को बड़ी राहत मिल सकेगी. कंपनी को जहां भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, वहीं उसके ग्राहकों की संख्या घट रही है और प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) नीचे आ रहा है. इसके अलावा कंपनी पर करीब 50,000 करोड़ रुपये का एजीआर का बकाया है. इससे पहले इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को एजीआर के बकाये का भुगतान दस साल में करने की अनुमति दी है. इसकी शुरुआत अगले वित्त वर्ष से होगी. हालांकि, कंपनियों को 10 प्रतिशत बकाया का भुगतान इसी वित्त वर्ष में करना होगा.

‘अच्छा है फैसला’

टक्कर ने कहा, ‘‘10 साल में भुगतान कोर्ट के फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके अलावा 10 प्रतिशत का शुरुआती भुगतान करना होगा, जो कंपनी पहले ही टेलीकॉम विभाग को अदा कर चुकी है. ऐसे में कोर्ट के फैसले के अनुरूप हमें पहला भुगतान मार्च, 2022 में करना होगा. यह दस साल के भुगतान की पहली किस्त होगी. इस फैसले का नतीजा अच्छा रहा है.’’

कोर्ट का जताया आभार

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के टुकड़ों में भुगतान के फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह काफी उपयोगी होगा, क्योंकि हम अपनी 10 साल की यात्रा की योजना बना सकेंगे. उन्होंने भुगतान के लिए 10 साल का समय देने पर कोर्ट का आभार जताया. मोबाइल शुल्कों में बढ़ोतरी पर उन्होंने कहा कि पूरी इंडस्ट्री का मानना है कि भारत में दरें टिकने योग्य नहीं हैं. कंपनियों को अपनी लागत से कम पर बिक्री करनी पड़ रही है. पिछले सालों के दौरान डेटा और वॉयस के इस्तेमाल में भारी वृद्धि का उल्लेख करते हुए टक्कर ने कहा कि लघु अवधि मोबाइल दरों में बढ़ोतरी जरूरी है.

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